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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

कालिका माता मंदिर, पावागढ़

Kalika Mata Temple, Pavagadh

Panchmahal, गुजरात माँ कालिका (महाकाली); साथ में भद्रकाली और बहुचरा माता निःशुल्क प्रवेश

कालिका माता मंदिर (महाकाली मंदिर) गुजरात के पंचमहाल ज़िले में हालोल के पास पावागढ़ पर्वत के शिखर पर स्थित माँ महाकाली का प्राचीन मंदिर है। यह चांपानेर-पावागढ़ पुरातत्व उद्यान का भाग है, जो यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। प्रचलित मान्यता के अनुसार यहाँ सती के दाहिने पैर का अंगूठा गिरा था, इसलिए इसे शक्तिपीठ माना जाता है। अंबाजी और बेचराजी के साथ पावागढ़ गुजरात के प्रमुख शक्ति स्थलों में गिना जाता है।

मंदिर और विग्रह

गर्भगृह में तीन विग्रह हैं – मध्य में माँ महाकाली का लाल रंग का शीश रूप विग्रह, दाईं ओर भद्रकाली और बाईं ओर बहुचरा माता। यहाँ काली यंत्र की भी पूजा होती है। स्थानीय परंपरा के अनुसार देवी की पूजा सबसे पहले भील और कोली समुदायों ने की थी। मंदिर को इस क्षेत्र का सबसे पुराना मंदिर माना जाता है और इसे लगभग 10वीं–11वीं शताब्दी का बताया जाता है। पावागढ़ प्राचीन जैन तीर्थ भी रहा है।

नया शिखर और ध्वजा (2022)

सदियों पहले मंदिर का शिखर नष्ट हो गया था और उस स्थान पर सदनशाह पीर की दरगाह बनी थी, इसलिए शिखर पर ध्वजा नहीं फहराई जा सकती थी। पुनर्विकास के दौरान दरगाह के संरक्षकों की सहमति से उसे पास में स्थानांतरित किया गया और नया शिखर बनाया गया। 18 जून 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुनर्विकसित मंदिर का लोकार्पण कर लगभग 500 वर्ष बाद शिखर पर ध्वजा फहराई। इसी परियोजना में तलहटी से आने वाली सीढ़ियाँ चौड़ी की गईं।

प्रमुख उत्सव

  • चैत्री आठम: चैत्र सुद अष्टमी का बड़ा मेला, जिसमें हज़ारों श्रद्धालु आते हैं।
  • चैत्र और शारदीय नवरात्रि: गरबा, विशेष पूजा और भारी भीड़।
  • चौधरी समुदाय में जीवन में कम से कम एक बार पावागढ़ की यात्रा करने की परंपरा है।

यात्रा क्रम

तलहटी से सड़क मार्ग से माची तक पहुँचा जाता है। वहाँ से 1986 में शुरू हुए पावागढ़ रोपवे से या पैदल सीढ़ियों से शिखर तक जाया जाता है। पुराने पैदल मार्ग पर पताई रावल के महल के खंडहर दिखते हैं। नीचे चांपानेर में जामी मस्जिद और अन्य ऐतिहासिक स्मारक भी देखे जा सकते हैं। वडोदरा से एक दिन की यात्रा में पावागढ़ आसानी से देखा जा सकता है।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 5:00 से शाम लगभग 7:00 बजे तक
  • रोपवे: दिन के समय चलता है, मौसम के अनुसार बदलाव संभव

नवरात्रि और चैत्री आठम पर भीड़ बहुत अधिक रहती है, सुबह जल्दी चढ़ाई शुरू करना अच्छा है।

मुख्य आकर्षण

  • माँ महाकाली – गर्भगृह के मध्य में लाल रंग का शीश रूप विग्रह, दाईं ओर भद्रकाली और बाईं ओर बहुचरा माता।
  • काली यंत्र की पूजा।
  • 2022 में बना नया शिखर और ध्वजा।
  • पावागढ़ रोपवे और पहाड़ी से चांपानेर का दृश्य।
  • चांपानेर-पावागढ़ पुरातत्व उद्यान – यूनेस्को विश्व धरोहर।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: वडोदरा से लगभग 50 किमी, हालोल होकर; तलहटी से माची तक बस/गाड़ी, फिर रोपवे या सीढ़ियाँ।
  • रेल मार्ग: निकटतम बड़ा स्टेशन वडोदरा जंक्शन।
  • हवाई मार्ग: वडोदरा हवाई अड्डा (लगभग 50 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पावागढ़ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
प्रचलित मान्यता के अनुसार पावागढ़ में सती के दाहिने पैर का अंगूठा गिरा था, इसलिए इस मंदिर को शक्तिपीठ माना जाता है।
पावागढ़ मंदिर के गर्भगृह में कौन-कौन से विग्रह हैं?
गर्भगृह के मध्य में माँ महाकाली का लाल रंग का शीश रूप विग्रह है, उनकी दाईं ओर भद्रकाली और बाईं ओर बहुचरा माता विराजती हैं। साथ ही काली यंत्र की पूजा होती है।
पावागढ़ मंदिर पर ध्वजा कब फहराई गई?
मंदिर का शिखर सदियों पहले नष्ट हो गया था और उस स्थान पर दरगाह थी। दरगाह के संरक्षकों की सहमति से उसे पास में स्थानांतरित कर नया शिखर बनाया गया और 18 जून 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगभग 500 वर्ष बाद शिखर पर ध्वजा फहराई।
पावागढ़ मंदिर तक कैसे पहुँचें?
तलहटी से माची तक सड़क मार्ग है। माची से रोपवे द्वारा या पैदल सीढ़ियों से शिखर के मंदिर तक पहुँचा जाता है। वडोदरा यहाँ से लगभग 50 किमी है।
पावागढ़ में मुख्य मेला कब लगता है?
चैत्र सुद आठम (चैत्री अष्टमी) को बड़ा मेला लगता है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि में भी हज़ारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।

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