भवनाथ महादेव मंदिर उत्तर गुजरात के अरवल्ली जिले की भिलोड़ा तालुका के मऊ गाँव में स्थित भगवान शिव का प्राचीन मंदिर है। यह भिलोड़ा से लगभग 6 किमी दूर हाथमती नदी के जलाशय क्षेत्र में है। यहाँ मिले एक शिलालेख के आधार पर मंदिर को लगभग 1300 वर्ष पुराना माना जाता है। परिसर में शिव मंदिर के साथ अवन ऋषि का मंदिर और पवित्र भृगु कुंड भी है।
भृगु ऋषि और भवनाथ की कथा
स्थानीय मान्यता के अनुसार महर्षि भृगु ने इसी नदी के तट पर भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिव यहाँ भवनाथ रूप में प्रकट हुए। परिसर में अवन ऋषि का मंदिर भी है, जिन्हें भृगु ऋषि का पुत्र बताया जाता है। कुछ स्थानीय कथाएँ इस स्थान को च्यवन ऋषि से भी जोड़ती हैं।
भृगु कुंड
मंदिर के पास स्थित भृगु कुंड श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि इसके जल में स्नान करने से कुष्ठ जैसे चर्म रोग दूर होते हैं। आसपास के परिवार यहाँ बच्चों का मुंडन संस्कार कराने भी आते हैं।
प्रमुख उत्सव और मेला
- श्रावण का अंतिम सोमवार: मंदिर का प्रमुख मेला, जिसमें भारी भीड़ उमड़ती है।
- महाशिवरात्रि: रात भर पूजन और मेला।
यात्रा क्रम
भिलोड़ा से स्थानीय सड़क द्वारा मंदिर पहुँचा जा सकता है। इसी क्षेत्र में अरवल्ली जिले का प्रसिद्ध शामलाजी मंदिर भी है, इसलिए यात्री अक्सर दोनों के दर्शन एक साथ करते हैं।
दर्शन का समय
- दर्शन: सुबह से संध्या तक (निश्चित समय प्रकाशित नहीं; स्थानीय रूप से पुष्टि करें)
श्रावण के अंतिम सोमवार और महाशिवरात्रि पर भारी भीड़ रहती है।
मुख्य आकर्षण
- भवनाथ महादेव – मुख्य शिव मंदिर।
- अवन ऋषि का मंदिर – जिन्हें भृगु ऋषि का पुत्र बताया जाता है।
- भृगु कुंड – मान्यता है कि इसमें स्नान से चर्म रोग दूर होते हैं।
- हाथमती नदी का जलाशय क्षेत्र और आसपास की अरावली पहाड़ियाँ।
कैसे पहुँचें
- सड़क मार्ग: भिलोड़ा से लगभग 6 किमी; हिम्मतनगर और शामलाजी से सड़क मार्ग से जुड़ा।
- रेल मार्ग: निकटतम बड़ा स्टेशन हिम्मतनगर, वहाँ से बस या टैक्सी।
- हवाई मार्ग: सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, अहमदाबाद।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
भवनाथ मंदिर मऊ कहाँ है?
भवनाथ मंदिर कितना पुराना है?
भृगु कुंड का क्या महत्व है?
भवनाथ मंदिर से भृगु ऋषि का क्या संबंध है?
भवनाथ मंदिर मऊ में मेला कब लगता है?
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