मुख्य सामग्री पर जाएँ

कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

शामलाजी मंदिर, अरवल्ली

Shamlaji Temple, Aravalli

Aravalli, गुजरात भगवान विष्णु – गदाधर (शामलिया) रूप, कृष्ण रूप में पूजित निःशुल्क प्रवेश

शामलाजी मंदिर गुजरात के अरवल्ली ज़िले में, राजस्थान सीमा के पास, जंगली पहाड़ियों से घिरी घाटी में मेश्वो नदी के तट पर स्थित भगवान विष्णु का प्राचीन मंदिर है। यहाँ भगवान गदाधर रूप में विराजते हैं और श्याम वर्ण के कारण शामलाजी या शामलिया कहलाते हैं। आदिवासी समुदाय उन्हें प्रेम से “कालियो देव” कहते हैं। यह उत्तर गुजरात का प्रमुख वैष्णव तीर्थ है।

मंदिर और विग्रह

गर्भगृह में चतुर्भुज विष्णु की प्रतिमा है, जिनके हाथ में असामान्य रूप से बड़ी गदा है – इसी से नाम गदाधर पड़ा। विद्वान इस प्रतिमा को लगभग 7वीं–8वीं शताब्दी का मानते हैं। समय के साथ यहाँ कृष्ण भक्ति का प्रभाव बढ़ा और प्रतिमा के हाथ में छोटी सोने की बाँसुरी भी जोड़ी गई। यहाँ सोलंकी काल में मंदिर होने के संकेत मिलते हैं, पर वर्तमान मंदिर 15वीं–16वीं शताब्दी का माना जाता है। मंदिर की बाहरी दीवारों पर विष्णु, लक्ष्मी-नारायण तथा भागवत पुराण और रामायण के प्रसंगों की सुंदर नक्काशी है। गरुड़ की एक प्रतिमा पर 1584 ई. का लेख मिलता है।

कार्तिक पूर्णिमा का मेला

शामलाजी का सबसे बड़ा उत्सव कार्तिक पूर्णिमा का मेला है, जिसे गुजरात के सबसे पुराने मेलों में गिना जाता है। गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश से लाखों भक्त, विशेषकर भील और अन्य आदिवासी समुदाय, यहाँ आते हैं। भक्त मेश्वो नदी में स्नान कर भगवान के दर्शन करते हैं, और मेले में चाँदी के गहने, बर्तन और कपड़ों की खूब ख़रीदारी होती है। मेश्वो नदी के कुछ गहरे कुंडों में स्नान को लेकर भी लोक-आस्थाएँ जुड़ी हैं।

आसपास के दर्शन

  • हरिश्चंद्र नी चौरी – पास का प्राचीन मंदिर, जिसे यहाँ का सबसे पुराना सुरक्षित मंदिर माना जाता है।
  • देवनी मोरी – लगभग 2 किमी दूर प्राचीन बौद्ध पुरातात्विक स्थल।
  • मोडासा (लगभग 29 किमी) और अंबाजी की ओर भी यात्रा जोड़ी जा सकती है।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से रात लगभग 8:30 बजे तक, दोपहर में कुछ समय पट बंद
  • आरती: मंगला आरती सुबह और संध्या आरती

कार्तिक पूर्णिमा के मेले के दिनों में समय में बदलाव संभव है।

मुख्य आकर्षण

  • गदाधर विष्णु – श्याम वर्ण की चतुर्भुज प्रतिमा, जिसके हाथ में बड़ी गदा है।
  • बाहरी दीवारों पर भागवत और रामायण के प्रसंगों की नक्काशी।
  • मेश्वो नदी और उसके कुंड, जहाँ मेले में स्नान होता है।
  • हरिश्चंद्र नी चौरी – पास का प्राचीन मंदिर।
  • देवनी मोरी का बौद्ध पुरातात्विक स्थल (लगभग 2 किमी)।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: अहमदाबाद–उदयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर; मोडासा से लगभग 29 किमी, भिलोडा से लगभग 20 किमी।
  • रेल मार्ग: शामलाजी रोड स्टेशन (लगभग 14 किमी)।
  • हवाई मार्ग: सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, अहमदाबाद।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

शामलाजी में किस देवता की पूजा होती है?
शामलाजी में भगवान विष्णु की गदाधर रूप में पूजा होती है। श्याम (काले) वर्ण के कारण उन्हें शामलाजी या शामलिया कहा जाता है और भक्त उन्हें कृष्ण रूप में भी पूजते हैं।
शामलाजी को 'कालियो देव' क्यों कहते हैं?
भील और अन्य आदिवासी समुदाय भगवान के श्याम वर्ण के कारण उन्हें 'कालियो देव' या 'कालिया बावजी' कहकर पूजते हैं। ये समुदाय मेले में बड़ी संख्या में आते हैं।
शामलाजी का मेला कब लगता है?
शामलाजी का बड़ा मेला कार्तिक पूर्णिमा (कार्तिक सुद 15) के आसपास लगता है। भक्त मेश्वो नदी में स्नान कर दर्शन करते हैं और गुजरात, राजस्थान व मध्य प्रदेश से लाखों लोग आते हैं।
शामलाजी मंदिर कितना पुराना है?
वर्तमान मंदिर 15वीं–16वीं शताब्दी का माना जाता है, जबकि गर्भगृह की विष्णु प्रतिमा उससे बहुत पुरानी, लगभग 7वीं–8वीं शताब्दी की मानी जाती है।
शामलाजी कैसे पहुँचें?
शामलाजी अहमदाबाद–उदयपुर राजमार्ग पर मोडासा से लगभग 29 किमी है। निकटतम रेलवे स्टेशन शामलाजी रोड (लगभग 14 किमी) और निकटतम हवाई अड्डा अहमदाबाद है।

दर्शन की जानकारी साझा करें

WhatsApp Facebook