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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

श्री स्वामिनारायण मंदिर (गोपीनाथजी देव), गढ़डा

Shree Swaminarayan Mandir (Gopinathji Dev), Gadhada

Botad, गुजरात श्री गोपीनाथजी देव (श्रीकृष्ण) और राधिकाजी; हरिकृष्ण महाराज (स्वामिनारायण) निःशुल्क प्रवेश

श्री स्वामिनारायण मंदिर, गढ़डा (गढ़पुर) गुजरात के बोटाद जिले में घेला नदी के तट पर स्थित गोपीनाथजी देव का प्रसिद्ध मंदिर है। यह उन छह मंदिरों में से एक है जिन्हें स्वयं भगवान स्वामिनारायण ने बनवाया था। भगवान स्वामिनारायण अपने जीवन के लगभग 25 वर्ष से अधिक समय यहीं भक्त दादा खाचर के दरबार में रहे, इसलिए गढ़डा को स्वामिनारायण संप्रदाय में अत्यंत पवित्र भूमि माना जाता है। यहाँ दिए गए उनके बहुत से प्रवचन वचनामृत ग्रंथ में संकलित हैं।

मंदिर का निर्माण

दादा खाचर और उनकी बहनों जीवुबा और लाडुबा के आग्रह पर भगवान स्वामिनारायण ने दादा खाचर के निवास के आँगन में यह मंदिर बनवाया; भूमि भी दादा खाचर के दरबार ने दी। निर्माण की देखरेख वे स्वयं करते थे और उनकी अनुपस्थिति में स्वामी विरक्तानंद। विक्रम संवत 1885 में, 9 अक्टूबर 1828 को मूर्तियों की प्रतिष्ठा हुई।

मंदिर और विग्रह

ऊँची पीठिका पर बना यह मंदिर दो मंज़िला है और इसके तीन शिखर हैं; चारों ओर विशाल चौक, सभा मंडप, धर्मशालाएँ और भोजनशालाएँ हैं। मई 2012 में शिखरों को स्वर्ण से मंडित किया गया।

  • केंद्रीय गर्भगृह: गोपीनाथजी देव, राधिकाजी और हरिकृष्ण महाराज।
  • पश्चिमी गर्भगृह: धर्मदेव, भक्तिमाता और वासुदेव (बाल स्वरूप स्वामिनारायण)।
  • पूर्वी गर्भगृह: रेवती-बलदेवजी, श्रीकृष्ण और सूर्यनारायण।

दादा खाचर का दरबार और प्रसादी स्थल

दादा खाचर का दरबार आज भी मूल रूप में संरक्षित है। यहाँ वासुदेव नारायण का कक्ष है, जहाँ दिए गए प्रवचन वचनामृत में दर्ज हैं, साथ ही अक्षर ओरडी मंदिर और भगवान की प्रसादी वस्तुओं का संग्रहालय भी है। मंदिर के दक्षिण में बहने वाली घेला नदी में भगवान और संत स्नान करते थे; नदी के नारायण धरो और सहस्र धरो पवित्र माने जाते हैं, और किनारे पर नीलकंठ महादेव तथा हनुमान जी के छोटे मंदिर हैं। नगर के बाहर लक्ष्मीवाडी में भगवान स्वामिनारायण का अंतिम संस्कार हुआ था; वहाँ एक शिखर वाला मंदिर और निष्कुलानंद स्वामी का कक्ष है।

प्रमुख उत्सव

  • जन्माष्टमी और राधाष्टमी – विशेष श्रृंगार और कीर्तन।
  • होली (फूलडोल) और दीपावली–अन्नकूट – संप्रदाय के बड़े उत्सव।

गढ़डा से सालंगपुर के कष्टभंजन हनुमान मंदिर तक सड़क मार्ग से पहुँचा जा सकता है, इसलिए यात्री प्रायः दोनों स्थानों के दर्शन एक साथ करते हैं।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 5:30 से रात लगभग 8:30 बजे तक (दोपहर में कुछ समय बंद)
  • आरती: मंगला, श्रृंगार, राजभोग और संध्या आरती

उत्सवों पर समय बदल सकता है।

मुख्य आकर्षण

  • गोपीनाथजी देव और राधिकाजी – केंद्रीय गर्भगृह में, साथ में हरिकृष्ण महाराज।
  • दादा खाचर का दरबार – मूल रूप में संरक्षित, जहाँ भगवान स्वामिनारायण वर्षों तक रहे।
  • वासुदेव नारायण का कक्ष – जहाँ हुए प्रवचन वचनामृत में संकलित हैं।
  • घेला नदी – मंदिर के दक्षिण में; नारायण धरो और सहस्र धरो।
  • लक्ष्मीवाडी – जहाँ भगवान स्वामिनारायण का अंतिम संस्कार हुआ।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: बोटाद, भावनगर, अहमदाबाद और राजकोट से बसें; सालंगपुर से भी सड़क मार्ग से जुड़ा।
  • रेल मार्ग: बोटाद जंक्शन निकटतम बड़ा स्टेशन।
  • हवाई मार्ग: भावनगर या अहमदाबाद हवाई अड्डा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गढ़डा स्वामिनारायण मंदिर किसने बनवाया?
यह मंदिर स्वयं भगवान स्वामिनारायण ने दादा खाचर और उनकी बहनों जीवुबा व लाडुबा के आग्रह पर बनवाया था। वे निर्माण की देखरेख स्वयं करते थे। यह उनके द्वारा बनवाए गए छह मंदिरों में से एक है।
गढ़डा मंदिर में मूर्ति प्रतिष्ठा कब हुई?
मूर्ति प्रतिष्ठा विक्रम संवत 1885 में, 9 अक्टूबर 1828 को हुई थी।
गढ़डा मंदिर में कौन-कौन से देव विराजते हैं?
केंद्रीय गर्भगृह में गोपीनाथजी देव और राधिकाजी, पश्चिमी गर्भगृह में धर्मदेव, भक्तिमाता और वासुदेव (स्वामिनारायण), तथा पूर्वी गर्भगृह में रेवती-बलदेवजी, श्रीकृष्ण और सूर्यनारायण विराजते हैं।
गढ़डा का स्वामिनारायण संप्रदाय में क्या महत्व है?
भगवान स्वामिनारायण लगभग 25 वर्ष से अधिक समय गढ़डा में दादा खाचर के दरबार में रहे। यहाँ दिए गए उनके बहुत से प्रवचन 'वचनामृत' ग्रंथ में संकलित हैं।
गढ़डा मंदिर के शिखर सोने के क्यों दिखते हैं?
मई 2012 में मंदिर के शिखरों को स्वर्ण से मंडित किया गया, जिससे यह स्वर्ण शिखर वाला गुजरात का पहला मंदिर बताया जाता है।

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