चंद्रभागा शक्तिपीठ, जिसे प्रभास शक्तिपीठ भी कहा जाता है, गुजरात के गिर सोमनाथ ज़िले में प्रभास पाटन के त्रिवेणी संगम के पास स्थित है – प्रसिद्ध सोमनाथ ज्योतिर्लिंग से लगभग एक किलोमीटर दूर। इसकी गिनती 51 शक्तिपीठों में होती है। मान्यता है कि यहाँ सती का उदर (पेट) गिरा था। यहाँ की शक्ति चंद्रभागा और भैरव वक्रतुंड हैं। स्थानीय रूप से यह स्थान माँ महालक्ष्मी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।
चंद्रभागा रूप में देवी
प्रभास में सती की आराधना माँ चंद्रभागा के रूप में होती है। प्रभास क्षेत्र का संबंध चंद्रदेव से माना जाता है – कथा है कि दक्ष के शाप से मुक्ति के लिए चंद्रमा ने यहीं शिव की आराधना की थी – इसलिए देवी का चंद्रभागा नाम इस क्षेत्र से गहराई से जुड़ा है। वक्रतुंड भैरव पीठ के रक्षक माने जाते हैं और उनका स्थान मंदिर के पास ही है। परिसर में माँ महालक्ष्मी के साथ गणेश, नंदी सहित शिवलिंग, दत्तात्रेय, हनुमान और भैरव के स्थान तथा एक अखंड धूना है।
त्रिवेणी संगम और प्रभास क्षेत्र
यह पीठ त्रिवेणी संगम के पास है, जहाँ हिरण, कपिला और सरस्वती नदियों का संगम माना जाता है। मंदिर सोमनाथ ट्रस्ट के श्री राम मंदिर के पीछे, हरिहर वन के पास है; रास्ता राम मंदिर के प्रवेश द्वार के बाईं ओर से जाता है। प्रभास क्षेत्र में ही भालका तीर्थ और देहोत्सर्ग तीर्थ भी हैं, जो भगवान श्रीकृष्ण की लीला-समाप्ति की कथा से जुड़े हैं। यह पीठ अपेक्षाकृत कम प्रसिद्ध है, इसलिए कई यात्री सोमनाथ आकर भी इसके दर्शन से चूक जाते हैं।
स्थान को लेकर मत
प्रभास शक्तिपीठ का क्षेत्र – सोमनाथ के पास प्रभास पाटन – लगभग सभी सूचियों में एक जैसा है, पर ठीक किस मंदिर को पीठ माना जाए, इस पर मत अलग हैं। कुछ स्रोत त्रिवेणी संगम को ही पीठ मानते हैं और कहते हैं कि यहाँ देवी की शक्ति नदियों के संगम में निवास करती है। कुछ संगम के पास स्थित महाकाली मंदिर को शक्तिपीठ बताते हैं। कुछ पुराने लेख इसे गिरनार पर्वत से भी जोड़ते हैं।
प्रमुख उत्सव
- चैत्र और शारदीय नवरात्रि: देवी की विशेष पूजा।
- महाशिवरात्रि और श्रावण मास: सोमनाथ आने वाले श्रद्धालु यहाँ भी दर्शन करते हैं।
- भैरव जयंती पर वक्रतुंड भैरव की विशेष पूजा।
- कार्तिक पूर्णिमा पर सोमनाथ में मेला लगता है।
यात्रा सुझाव
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बाद त्रिवेणी संगम की ओर जाते हुए यह पीठ आसानी से देखा जा सकता है। स्थानीय गाइड प्रायः इसे अपने दौरे में शामिल नहीं करते, इसलिए श्री राम मंदिर पहुँचकर रास्ता पूछ लें। अक्टूबर से मार्च तक का मौसम यात्रा के लिए सबसे अच्छा है।
दर्शन का समय
- दर्शन: सुबह लगभग 5:00 से दोपहर 12:00 बजे और शाम 4:00 से रात 9:00 बजे तक
पूजा के समय गर्भगृह में फ़ोटो न लें और मंदिर के नियमों का पालन करें।
मुख्य आकर्षण
- माँ चंद्रभागा (महालक्ष्मी) – प्रभास शक्तिपीठ की देवी।
- वक्रतुंड भैरव, गणेश, शिवलिंग और दत्तात्रेय के स्थान, अखंड धूना।
- त्रिवेणी संगम – हिरण, कपिला और सरस्वती का संगम।
- सोमनाथ ज्योतिर्लिंग, भालका तीर्थ और देहोत्सर्ग तीर्थ।
कैसे पहुँचें
- रेल मार्ग: सोमनाथ रेलवे स्टेशन (मंदिर क्षेत्र से लगभग 1.5 किमी) या वेरावल जंक्शन (लगभग 6 किमी)।
- सड़क मार्ग: सोमनाथ से त्रिवेणी संगम की ओर; सोमनाथ ट्रस्ट के श्री राम मंदिर के पीछे स्थित।
- हवाई मार्ग: केशोद हवाई अड्डा (लगभग 55 किमी) या दीव हवाई अड्डा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रभास शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
चंद्रभागा शक्तिपीठ कहाँ है?
सोमनाथ मंदिर से चंद्रभागा शक्तिपीठ कितनी दूर है?
प्रभास के त्रिवेणी संगम में कौन सी नदियाँ मिलती हैं?
चंद्रभागा शक्तिपीठ के मुख्य उत्सव कौन से हैं?
चंद्रभागा शक्तिपीठ (प्रभास), प्रभास पाटन सोमनाथ इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
-
Botad, गुजरात कष्टभंजन हनुमान मंदिर, सालंगपुर श्री कष्टभंजन देव हनुमानजी
-
द्वारका, गुजरात श्री केशवरायजी मंदिर, बेट द्वारका श्री केशवरायजी (भगवान श्रीकृष्ण)
-
Kutch, गुजरात लखेश्वर शिव मंदिर, केरा (कच्छ) भगवान शिव (लखेश्वर महादेव)
-
द्वारका, गुजरात श्री द्वारकाधीश मंदिर, द्वारका भगवान श्रीकृष्ण (द्वारकाधीश)
-
द्वारका, गुजरात नवलखा मंदिर, घुमली सूर्य देव (मंदिर अब खंडहर अवस्था में)
-
बनासकांठा, गुजरात अंबाजी मंदिर, बनासकांठा माँ अंबा (श्री वीसा यंत्र); भैरव – बटुक