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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

भवनाथ महादेव मंदिर, जूनागढ़

Bhavnath Mahadev Temple, Junagadh

Junagadh, गुजरात भगवान शिव (भवनाथ महादेव) निःशुल्क प्रवेश

भवनाथ महादेव मंदिर गुजरात के जूनागढ़ नगर में गिरनार पर्वत की तलहटी पर स्थित भगवान शिव का प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर भवनाथ क्षेत्र में है, जहाँ से गिरनार की सीढ़ियों की चढ़ाई शुरू होती है। भक्तों की मान्यता है कि यहाँ का शिवलिंग स्वयंभू है। हर वर्ष महाशिवरात्रि पर यहाँ लगने वाला भवनाथ मेला, जिसमें नागा साधु मृगी कुंड में स्नान करते हैं, सौराष्ट्र का सबसे प्रसिद्ध धार्मिक मेला है।

कथा और मृगी कुंड

मंदिर की उत्पत्ति का ठीक-ठीक इतिहास ज्ञात नहीं है, पर इसे पुराण काल से जुड़ा माना जाता है। प्रचलित कथा के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती जब गिरनार के ऊपर से जा रहे थे, तब उनका दिव्य वस्त्र नीचे गिरकर आज के मृगी कुंड पर आ पड़ा। तभी से यह स्थान शिव उपासकों के लिए अत्यंत पवित्र माना गया। मृगी कुंड मंदिर परिसर में ही है।

महाशिवरात्रि का भवनाथ मेला

माघ महीने में (फरवरी-मार्च) महाशिवरात्रि से पहले लगभग पाँच दिन का मेला लगता है। गुजरात, कच्छ और देश के अन्य भागों से लाखों श्रद्धालु और दशनामी संप्रदाय के सैकड़ों नागा साधु यहाँ पहुँचते हैं। शिवरात्रि की रात नागा साधुओं की शोभायात्रा निकलती है, जिसमें धर्मध्वज, शंख-नाद और पालकी में भगवान दत्तात्रेय की सजी हुई प्रतिमा होती है। मध्यरात्रि को साधु मृगी कुंड में स्नान करते हैं और फिर भवनाथ महादेव की पूजा होती है – यही मेले का चरम क्षण है।

अन्य उत्सव

  • गिरनार लीली परिक्रमा: कार्तिक मास में गिरनार की परिक्रमा, जो भवनाथ क्षेत्र से ही आरंभ होती है।
  • श्रावण मास में अभिषेक और विशेष पूजा।

आसपास के दर्शन

भवनाथ से ही गिरनार की चढ़ाई शुरू होती है, जिसके शिखरों पर अंबाजी, गोरखनाथ और दत्तात्रेय के स्थान तथा जैन मंदिर हैं। पास ही दामोदर कुंड और राधा दामोदर मंदिर हैं, और जूनागढ़ शहर में उपरकोट किला व अशोक शिलालेख भी देखे जा सकते हैं।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से रात लगभग 9:00 बजे तक
  • आरती: प्रातः और संध्या

महाशिवरात्रि की रात मध्यरात्रि को विशेष पूजा होती है और मंदिर देर रात तक खुला रहता है।

मुख्य आकर्षण

  • भवनाथ महादेव – स्वयंभू माने जाने वाला शिवलिंग।
  • मृगी कुंड – मंदिर परिसर का पवित्र कुंड, जहाँ शिवरात्रि की रात नागा साधु स्नान करते हैं।
  • महाशिवरात्रि (भवनाथ) मेला – पाँच दिन का विशाल मेला।
  • गिरनार तलहटी – गिरनार की सीढ़ियाँ यहीं पास से शुरू होती हैं।
  • दामोदर कुंड और राधा दामोदर मंदिर (पास ही)।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: जूनागढ़ जंक्शन (लगभग 7–8 किमी)।
  • सड़क मार्ग: जूनागढ़ शहर से गिरनार तलहटी मार्ग पर; ऑटो और स्थानीय बसें। राजकोट से जूनागढ़ लगभग 100 किमी।
  • हवाई मार्ग: केशोद हवाई अड्डा (लगभग 40 किमी) या राजकोट हवाई अड्डा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

भवनाथ महादेव मंदिर कहाँ है?
भवनाथ महादेव मंदिर गुजरात के जूनागढ़ नगर के भवनाथ क्षेत्र में गिरनार पर्वत की तलहटी में स्थित है। गिरनार की चढ़ाई इसी क्षेत्र से शुरू होती है।
मृगी कुंड का क्या महत्व है?
मान्यता है कि शिव-पार्वती जब गिरनार के ऊपर से जा रहे थे, तब उनका दिव्य वस्त्र इसी कुंड पर गिरा था। महाशिवरात्रि की रात नागा साधु मृगी कुंड में पवित्र स्नान करते हैं।
भवनाथ मेला कब लगता है?
भवनाथ (महाशिवरात्रि) मेला माघ महीने में महाशिवरात्रि से पहले लगभग पाँच दिन तक चलता है, जो फरवरी-मार्च में पड़ता है। मुख्य पूजा महाशिवरात्रि की मध्यरात्रि को होती है।
भवनाथ मेले में नागा साधु क्या करते हैं?
दशनामी संप्रदाय के सैकड़ों नागा साधु मेले में भाग लेते हैं। वे शोभायात्रा निकालते हैं, मृगी कुंड में स्नान करते हैं और फिर भवनाथ महादेव की पूजा करते हैं।
भवनाथ मंदिर कितना पुराना है?
मंदिर को प्राचीन माना जाता है और इसकी उत्पत्ति ठीक-ठीक ज्ञात नहीं है। भक्तों की मान्यता है कि यहाँ का शिवलिंग स्वयंभू है।

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