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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

संतराम मंदिर, नडियाद

Santram Mandir, Nadiad

Kheda, गुजरात संत संतराम महाराज (समाधि स्थान) निःशुल्क प्रवेश

संतराम मंदिर गुजरात के खेड़ा ज़िले के नडियाद शहर के बीच स्थित अवधूत संत संतराम महाराज का समाधि मंदिर है। यह नडियाद की पहचान माना जाता है और चरोतर क्षेत्र के लोगों की इसमें गहरी आस्था है। मंदिर में किसी देव प्रतिमा की जगह संतराम महाराज की समाधि ही गर्भगृह है, जिसके दर्शन के लिए दूर-दूर से भक्त आते हैं।

संतराम महाराज

संतराम महाराज अवधूत परंपरा के संत थे, जो गिरनार से नडियाद आए थे – इसलिए लोग उन्हें गिरनारी बावा भी कहते थे। खेड़ा ज़िले के स्रोतों के अनुसार वे लगभग 15 वर्ष नडियाद में रहे। मंदिर परंपरा के अनुसार उन्होंने विक्रम संवत 1887 (लगभग 1831 ई.) की माघ पूर्णिमा को जीवित समाधि ली। उनके बाद शिष्य लक्ष्मणदासजी ने गद्दी संभाली और शिष्य परंपरा आज तक चली आ रही है। समाधि स्थल पर बना छोटा स्थान समय के साथ बड़े मंदिर परिसर में बदल गया, पर मूल समाधि आज भी गर्भगृह है। मंदिर में एक अखंड ज्योत निरंतर जलती रहती है।

साकर वर्षा और प्रमुख उत्सव

  • माघ पूर्णिमा – समाधि महोत्सव: संध्या महाआरती के बाद मंदिर से भक्तों पर साकर (शक्कर की डलियाँ) बरसाई जाती है। मान्यता है कि यह प्रसाद पाने से मनोकामना पूरी होती है।
  • पौष पूर्णिमा: इस दिन भक्तों पर बेर (बोर) उछालने की परंपरा है।
  • देव दिवाली: मंदिर दीपों से सजाया जाता है।

यात्रा क्रम

नडियाद अहमदाबाद–वडोदरा मुख्य रेल मार्ग पर है और मंदिर स्टेशन से शहर के भीतर ही है। पास में आणंद और डाकोर का प्रसिद्ध रणछोड़राय मंदिर भी एक दिन की यात्रा में देखे जा सकते हैं।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह से रात तक (लगभग 6:00 से 21:00 बजे)

माघ पूर्णिमा के समाधि महोत्सव पर बहुत भीड़ रहती है।

मुख्य आकर्षण

  • संतराम महाराज की समाधि – मंदिर का गर्भगृह।
  • माघ पूर्णिमा की साकर वर्षा – मंदिर से भक्तों पर साकर (शक्कर की डलियाँ) की वर्षा।
  • अखंड ज्योत – मंदिर में निरंतर जलता दीपक।
  • पौष पूर्णिमा पर बेर (बोर) उछालने की परंपरा।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: नडियाद जंक्शन, अहमदाबाद–वडोदरा मुख्य रेल मार्ग पर; मंदिर शहर के बीच में।
  • सड़क मार्ग: अहमदाबाद, वडोदरा और आणंद से एसटी बसें।
  • हवाई मार्ग: वडोदरा (लगभग 59 किमी) या अहमदाबाद (लगभग 64 किमी) हवाई अड्डा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

संतराम महाराज कौन थे?
संतराम महाराज अवधूत परंपरा के संत थे, जो गिरनार से नडियाद आए थे। इसलिए उन्हें गिरनारी बावा भी कहा जाता है। नडियाद में लगभग 15 वर्ष रहने के बाद उन्होंने समाधि ली।
संतराम महाराज ने समाधि कब ली?
मंदिर परंपरा और ज़िला स्रोतों के अनुसार संतराम महाराज ने विक्रम संवत 1887 (लगभग 1831 ई.) की माघ पूर्णिमा को जीवित समाधि ली।
संतराम मंदिर में साकर वर्षा क्या है?
हर वर्ष माघ पूर्णिमा पर समाधि महोत्सव में संध्या महाआरती के बाद मंदिर से भक्तों पर साकर (शक्कर की डलियाँ) बरसाई जाती है, जिसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। इसे साकर वर्षा कहते हैं।
संतराम मंदिर किस शहर में है?
संतराम मंदिर गुजरात के खेड़ा ज़िले के नडियाद शहर के बीच में है। नडियाद रेलवे स्टेशन अहमदाबाद–वडोदरा मार्ग पर है।
संतराम मंदिर में किसकी पूजा होती है?
मंदिर में संतराम महाराज की समाधि ही गर्भगृह है और भक्त उन्हीं के दर्शन व पूजा करते हैं।

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