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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

श्री स्वामिनारायण मंदिर (नया मंदिर), भुज

New Swaminarayan Temple, Bhuj

Kutch, गुजरात नरनारायण देव, राधाकृष्ण, हरिकृष्ण महाराज (स्वामिनारायण), घनश्याम महाराज निःशुल्क प्रवेश

श्री स्वामिनारायण मंदिर (नया मंदिर) गुजरात के कच्छ जिले के मुख्यालय भुज में स्थित स्वामिनारायण संप्रदाय का प्रमुख मंदिर है। भुज का मूल मंदिर स्वयं भगवान स्वामिनारायण ने बनवाया था, जो 26 जनवरी 2001 के विनाशकारी भूकंप में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। उसके पास ही संगमरमर और सोने से बना यह भव्य नया मंदिर मई 2010 में प्रतिष्ठित हुआ। मंदिर का संचालन संप्रदाय की नरनारायण देव गादी करती है।

मूल मंदिर का इतिहास

भगवान स्वामिनारायण ने अपने जीवनकाल में भुज में मंदिर की स्थापना कराई और यहाँ नरनारायण देव तथा अपने स्वरूप हरिकृष्ण महाराज के विग्रह प्रतिष्ठित किए। यह मंदिर उस स्थान से जुड़ा माना जाता है जहाँ भुज यात्रा के समय उन्होंने स्थानीय संतों से भेंट की थी। लगभग दो शताब्दियों तक यह कच्छ के सत्संगियों का प्रमुख केंद्र रहा।

भूकंप और नया मंदिर

2001 के कच्छ भूकंप में भुज का अधिकांश भाग नष्ट हो गया और पुराना मंदिर भी बुरी तरह टूट गया, किंतु विग्रह सुरक्षित रहे। इसके बाद पास ही नए मंदिर का निर्माण शुरू हुआ, जिसमें लगभग सात वर्ष लगे। नए मंदिर में भगवान का सिंहासन, गुंबद और द्वार स्वर्ण से मंडित हैं, जबकि स्तंभ और छतें संगमरमर की हैं। इसमें एक मुख्य गुंबद और अनेक छोटे गुंबद हैं। उद्घाटन महोत्सव 15 से 23 मई 2010 तक चला, जिसमें ब्रिटेन और अफ्रीका सहित विदेशों से भी बड़ी संख्या में भक्त आए। इसी अवसर पर स्वामिनारायण के जीवन पर “सहजानंद” नामक 3-डी फ़िल्म भी दिखाई गई।

मंदिर और विग्रह

मुख्य देवता नरनारायण देव और राधाकृष्ण हैं। मूल मंदिर के नरनारायण देव और हरिकृष्ण महाराज के विग्रह नए मंदिर में लाए गए, साथ ही घनश्याम महाराज और भगवान की सुख शैया भी यहाँ दर्शन के लिए हैं।

प्रमुख उत्सव और आसपास के दर्शन

  • स्वामिनारायण जयंती (रामनवमी), जन्माष्टमी और अन्नकूट संप्रदाय के प्रमुख पर्व हैं।
  • पास में पुराना स्वामिनारायण मंदिर, रामकुंड बावड़ी, हमीरसर झील और आयना महल।
  • भुज से लगभग 20 किमी दूर केरा का प्राचीन शिव मंदिर भी देखा जा सकता है।

दर्शन का समय

  • सुबह: लगभग 6:00 से 11:00 बजे तक
  • संध्या: लगभग 4:00 से 9:00 बजे तक

दोपहर में पट बंद रहते हैं; उत्सवों पर समय बदल सकता है।

मुख्य आकर्षण

  • नरनारायण देव – मूल मंदिर से लाए गए मुख्य विग्रह।
  • राधाकृष्ण, घनश्याम महाराज और सुख शैया।
  • स्वर्ण मंडित सिंहासन, गुंबद और द्वार तथा संगमरमर के नक्काशीदार स्तंभ।
  • पास में पुराना स्वामिनारायण मंदिर, रामकुंड बावड़ी और हमीरसर झील।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: भुज रेलवे स्टेशन, वहाँ से ऑटो या टैक्सी।
  • सड़क मार्ग: मंदिर भुज शहर के भीतर हमीरसर झील क्षेत्र के पास; अहमदाबाद और गांधीधाम से नियमित बसें।
  • हवाई मार्ग: भुज हवाई अड्डा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

भुज में नया स्वामिनारायण मंदिर क्यों बनाया गया?
भगवान स्वामिनारायण द्वारा बनवाया गया पुराना मंदिर 26 जनवरी 2001 के कच्छ भूकंप में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद पास में ही संगमरमर और सोने से नया मंदिर बनाया गया।
नए स्वामिनारायण मंदिर की प्रतिष्ठा कब हुई?
नए मंदिर का उद्घाटन महोत्सव 15 से 23 मई 2010 तक चला। इसमें देश-विदेश से, विशेषकर ब्रिटेन और अफ्रीका से, बड़ी संख्या में भक्त आए।
भुज स्वामिनारायण मंदिर के मुख्य देवता कौन हैं?
मुख्य विग्रह नरनारायण देव और राधाकृष्ण हैं। मूल मंदिर के नरनारायण देव और हरिकृष्ण महाराज (स्वामिनारायण) के विग्रह नए मंदिर में स्थापित किए गए, साथ में घनश्याम महाराज और सुख शैया भी।
भुज स्वामिनारायण मंदिर का संचालन कौन करता है?
मंदिर का संचालन स्वामिनारायण संप्रदाय की नरनारायण देव गादी (अहमदाबाद गादी) के अंतर्गत होता है।
भुज स्वामिनारायण मंदिर के दर्शन का समय क्या है?
सामान्यतः सुबह लगभग 6:00 से 11:00 और संध्या लगभग 4:00 से 9:00 बजे तक दर्शन होते हैं। उत्सवों पर समय बदल सकता है।

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