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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

साधी माताजी मंदिर, खेरवा (मेहसाणा)

Sadhimataji Temple, Kherva (Mehsana)

Mehsana, गुजरात साधी माता (सधी माताजी) निःशुल्क प्रवेश

साधी माताजी मंदिर गुजरात के मेहसाणा ज़िले में खेरवा गाँव के पास, मेहसाणा-कलोल राजमार्ग पर स्थित साधी माता का मंदिर है। साधी माता रावल योगी समाज की कुलदेवी मानी जाती हैं और यही समाज मंदिर की देखरेख करता है। उत्तर गुजरात के ग्रामीण अंचल में यह मंदिर लोक-आस्था का प्रमुख केंद्र है।

मंदिर और पूजा परंपरा

मंदिर को बहुत पुराना माना जाता है। परंपरा के अनुसार इसे पूर्व पुजारी श्री खोडाभाई रावल ने बनवाया और उन्हीं का परिवार पीढ़ी-दर-पीढ़ी माता की पूजा करता आ रहा है। मंदिर एक विशाल नीम वृक्ष के नीचे बना है। सामने आँगन है, पीछे मेले के लिए खुला मैदान है और पुजारियों व यात्रियों के ठहरने के लिए धर्मशाला भी है।

मेला और आस्था

  • धरो आठम नो मेलो: हर वर्ष भादरवा सुद आठम को भरने वाला मुख्य मेला।
  • रविवार और मंगलवार: इन दिनों सबसे अधिक भक्त आते हैं।
  • कई श्रद्धालु मन्नत पूरी होने की कामना से नंगे पैर दर्शन करने आते हैं।
  • हिंदू नववर्ष पर भी दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है।

आसपास के दर्शन

मेहसाणा ज़िले में ही उंझा का उमिया माता मंदिर, मोढेरा का सूर्य मंदिर और बहुचराजी का बहुचर माता मंदिर हैं, जिन्हें एक ही यात्रा में जोड़ा जा सकता है।

दर्शन का समय

  • दर्शन: दिन भर, सुबह से संध्या तक
  • विशेष दिन: रविवार और मंगलवार को अधिक भक्त आते हैं

मुख्य आकर्षण

  • साधी माता – रावल योगी समाज की कुलदेवी।
  • विशाल नीम वृक्ष – जिसके नीचे मंदिर बना है।
  • धरो आठम का मेला – भादरवा सुद आठम पर।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: मंदिर मेहसाणा-कलोल राजमार्ग पर खेरवा गाँव से लगभग 2 किमी दक्षिण में है; मेहसाणा से लगभग 11 किमी।
  • रेल मार्ग: मेहसाणा जंक्शन और जगुदण स्टेशन निकट हैं।
  • हवाई मार्ग: सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, अहमदाबाद (लगभग 70 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

साधी माता किस समाज की कुलदेवी हैं?
साधी माता रावल योगी समाज की कुलदेवी मानी जाती हैं। समाज ही मंदिर की देखरेख करता है।
साधी माताजी मंदिर कहाँ है?
मंदिर गुजरात के मेहसाणा ज़िले में खेरवा गाँव से लगभग 2 किमी दक्षिण, मेहसाणा-कलोल राजमार्ग पर है। मेहसाणा से इसकी दूरी लगभग 11 किमी है।
यहाँ का प्रमुख मेला कौन सा है?
मुख्य मेला 'धरो आठम नो मेलो' है, जो हर वर्ष भादरवा सुद आठम को भरता है।
मंदिर में पूजा कौन करता है?
परंपरा के अनुसार मंदिर पूर्व पुजारी श्री खोडाभाई रावल ने बनवाया और उन्हीं का परिवार पीढ़ी-दर-पीढ़ी माता की पूजा करता आ रहा है।
दर्शन के लिए कौन से दिन विशेष हैं?
रविवार और मंगलवार को सबसे अधिक भक्त आते हैं। कई श्रद्धालु मन्नत के लिए नंगे पैर दर्शन करने आते हैं।

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