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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

सूर्य मंदिर, मोढेरा

Sun Temple, Modhera

Mehsana, गुजरात भगवान सूर्य (गर्भगृह में अब प्रतिमा नहीं, पूजा नहीं होती)

मोढेरा का सूर्य मंदिर गुजरात के मेहसाणा ज़िले के मोढेरा गाँव में पुष्पावती नदी के किनारे स्थित भगवान सूर्य को समर्पित 11वीं शताब्दी का भव्य मंदिर है। इसे चौलुक्य (सोलंकी) वंश के शासनकाल में बनाया गया और यह मारु-गुर्जर स्थापत्य का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। ध्यान रहे कि आज यहाँ पूजा नहीं होती – यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित राष्ट्रीय महत्व का स्मारक है और गर्भगृह खाली है। दिसंबर 2022 में इसे यूनेस्को की अस्थायी (टेंटेटिव) सूची में भी शामिल किया गया।

इतिहास

मंदिर का निर्माण चौलुक्य राजा भीमदेव प्रथम के काल में हुआ। गर्भगृह की एक दीवार पर उल्टा लगा एक शिलालेख विक्रम संवत 1083 (1026–27 ई.) का है, इसलिए गर्भगृह को इसके बाद का माना जाता है, यद्यपि इसे पक्की निर्माण तिथि नहीं माना जाता। स्थानीय लोग पुराने समय में इस स्थान को “सीता नी चौरी” और कुंड को “रामकुंड” कहते थे।

मंदिर की रचना

  • गूढ़मंडप: गर्भगृह सहित मुख्य मंदिर, जिसकी बाहरी दीवारों पर सूर्य और अन्य देवताओं की नक्काशी है।
  • सभामंडप: अलग से बना सभा या नृत्य मंडप, जिसमें 52 बारीक नक्काशीदार स्तंभ हैं।
  • सूर्य कुंड: सामने का विशाल सीढ़ीदार जलकुंड, जिसकी सीढ़ियों पर छोटे-छोटे देवालय बने हैं।

मंदिर पूर्वमुखी है और इस तरह बनाया गया कि विषुव (मार्च और सितंबर) के दिन सूर्योदय की किरणें गर्भगृह में सूर्य प्रतिमा के स्थान तक पहुँचती थीं।

मोढेरा नृत्य महोत्सव

1992 से गुजरात पर्यटन निगम हर वर्ष जनवरी के तीसरे सप्ताह में, उत्तरायण के बाद, तीन दिन का मोढेरा नृत्य महोत्सव (उत्तरार्ध महोत्सव) आयोजित करता है। मंदिर की रोशनी भरी पृष्ठभूमि में देश के शास्त्रीय नर्तक प्रस्तुति देते हैं।

आसपास के दर्शन

मोढेरा से बेचराजी का बहुचरा माता मंदिर पास ही है, जहाँ नियमित पूजा होती है। मेहसाणा होते हुए पाटन की रानी की वाव और सिद्धपुर का रुद्र महालय भी इसी यात्रा में देखे जा सकते हैं।

दर्शन का समय

  • दर्शन का समय: सूर्योदय से सूर्यास्त तक (लगभग सुबह 7:00 से शाम 6:00 बजे)

यह संरक्षित स्मारक है, यहाँ नियमित पूजा या आरती नहीं होती। संध्या के समय रोशनी में मंदिर देखने लायक होता है।

मुख्य आकर्षण

  • सूर्य कुंड – सीढ़ियों और छोटे-छोटे मंदिरों से घिरा विशाल जलकुंड।
  • सभामंडप – 52 नक्काशीदार स्तंभों वाला सभा/नृत्य मंडप।
  • गूढ़मंडप और गर्भगृह – विषुव के दिन सूर्योदय की किरणें गर्भगृह तक पहुँचती थीं।
  • दीवारों पर सूर्य, देवी-देवताओं और जीवन के दृश्यों की बारीक नक्काशी।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: मेहसाणा से लगभग 25 किमी, अहमदाबाद से लगभग 100 किमी; बेचराजी पास ही।
  • रेल मार्ग: निकटतम बड़ा स्टेशन मेहसाणा जंक्शन।
  • हवाई मार्ग: सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, अहमदाबाद।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या मोढेरा सूर्य मंदिर में पूजा होती है?
नहीं। मोढेरा सूर्य मंदिर अब पूजा-स्थल नहीं है। यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित राष्ट्रीय महत्व का स्मारक है और गर्भगृह में प्रतिमा नहीं है।
मोढेरा सूर्य मंदिर किसने बनवाया?
यह मंदिर 11वीं शताब्दी में चौलुक्य (सोलंकी) वंश के राजा भीमदेव प्रथम के काल में बना। एक उल्टे लगे शिलालेख के आधार पर गर्भगृह को 1026–27 ई. के बाद का माना जाता है।
मोढेरा सूर्य मंदिर के कितने भाग हैं?
मंदिर के तीन मुख्य भाग हैं – गर्भगृह सहित गूढ़मंडप, 52 स्तंभों वाला अलग सभामंडप और सामने सीढ़ीदार सूर्य कुंड (रामकुंड)।
मोढेरा सूर्य मंदिर की विशेष खगोलीय रचना क्या है?
मंदिर इस तरह बना है कि वसंत और शरद विषुव के दिन सूर्योदय की पहली किरणें गर्भगृह में सूर्य की प्रतिमा के स्थान तक पहुँचती थीं।
मोढेरा नृत्य महोत्सव कब होता है?
गुजरात पर्यटन निगम हर वर्ष जनवरी के तीसरे सप्ताह में, उत्तरायण के बाद, तीन दिन का मोढेरा नृत्य महोत्सव (उत्तरार्ध महोत्सव) आयोजित करता है, जिसमें मंदिर की पृष्ठभूमि में शास्त्रीय नृत्य होते हैं।

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