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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

रुद्र महालय मंदिर (रुद्रमाल), सिद्धपुर

Rudra Mahalaya Temple (Rudramal), Siddhpur

Patan, गुजरात भगवान रुद्र (शिव) – मंदिर खंडहर रूप में, नियमित पूजा नहीं निःशुल्क प्रवेश

रुद्र महालय (स्थानीय नाम रुद्रमाल) गुजरात के पाटन ज़िले के सिद्धपुर नगर में सरस्वती नदी के तट पर स्थित भगवान शिव का प्राचीन मंदिर है, जो आज खंडहर के रूप में है। सोलंकी काल में यह गुजरात के सबसे भव्य मंदिरों में गिना जाता था। आज यहाँ नियमित पूजा नहीं होती – बचे हुए तोरण और स्तंभ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा राष्ट्रीय महत्व के स्मारक के रूप में संरक्षित हैं।

निर्माण का इतिहास

मंदिर का निर्माण 943 ई. में सोलंकी (चौलुक्य) वंश के संस्थापक मूलराज के समय आरंभ हुआ। लगभग दो शताब्दियों बाद, 1140 ई. में प्रतापी राजा सिद्धराज जयसिंह ने इसे पूर्ण कर प्रतिष्ठित किया। मारु-गुर्जर शैली में बलुआ पत्थर से बना यह मंदिर बहुमंज़िला था। सिद्धराज जयसिंह के नाम से ही नगर को सिद्धपुर कहा जाने लगा, ऐसी मान्यता है।

विनाश और वर्तमान स्थिति

दिल्ली सल्तनत के अलाउद्दीन खिलजी की सेना ने मंदिर को क्षति पहुँचाई, और बाद में 15वीं शताब्दी में गुजरात के सुल्तान अहमद शाह प्रथम के समय इसे बड़े पैमाने पर तोड़ा गया। परिसर का पश्चिमी भाग नगर की जामा मस्जिद में बदल दिया गया। आज मुख्य संरचना के दो तोरण और चार स्तंभ बचे हैं, जिनकी नक्काशी से मंदिर की पुरानी भव्यता का अनुमान लगाया जा सकता है।

सिद्धपुर – मातृगया तीर्थ

सिद्धपुर स्वयं एक पवित्र तीर्थ है। यहाँ का बिंदु सरोवर माता के श्राद्ध (मातृ श्राद्ध) के लिए प्रसिद्ध है और इसे हिंदू परंपरा के पाँच पवित्र सरोवरों में गिना जाता है। रुद्र महालय देखने आने वाले यात्री प्रायः बिंदु सरोवर और सरस्वती तट के घाट भी जाते हैं।

यात्रा क्रम

सिद्धपुर अहमदाबाद–दिल्ली रेल मार्ग पर है। एक दिन की यात्रा में पाटन की रानी की वाव, मोढेरा का सूर्य मंदिर और बेचराजी का बहुचरा माता मंदिर भी जोड़े जा सकते हैं। नगर की पुरानी बोहरा हवेलियाँ भी दर्शनीय हैं।

दर्शन का समय

  • देखने का समय: सूर्योदय से सूर्यास्त तक

यह खंडहर रूप में संरक्षित स्मारक है, यहाँ पूजा-आरती नहीं होती।

मुख्य आकर्षण

  • दो तोरण और मुख्य संरचना के चार स्तंभ – सोलंकी नक्काशी के अवशेष।
  • परिसर का पश्चिमी भाग, जो बाद में जामा मस्जिद के रूप में बदला गया।
  • पास में बिंदु सरोवर – मातृ श्राद्ध का पवित्र स्थान।
  • सरस्वती नदी का तट।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: सिद्धपुर स्टेशन, अहमदाबाद–दिल्ली रेल मार्ग पर।
  • सड़क मार्ग: मेहसाणा और पाटन से नियमित बसें; अहमदाबाद से लगभग 110 किमी।
  • हवाई मार्ग: सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, अहमदाबाद।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

रुद्र महालय किसने बनवाया?
रुद्र महालय का निर्माण 943 ई. में सोलंकी वंश के संस्थापक मूलराज ने आरंभ किया और 1140 ई. में सिद्धराज जयसिंह ने इसे पूर्ण कर प्रतिष्ठित किया।
रुद्र महालय किस देवता को समर्पित था?
यह मंदिर भगवान रुद्र अर्थात शिव को समर्पित था, इसलिए इसे रुद्र महालय या रुद्रमाल कहा जाता है।
रुद्र महालय खंडहर कैसे बना?
दिल्ली सल्तनत के अलाउद्दीन खिलजी की सेना और बाद में गुजरात के सुल्तान अहमद शाह प्रथम के समय मंदिर को भारी क्षति पहुँचाई गई। परिसर का एक भाग जामा मस्जिद में बदल दिया गया।
क्या रुद्र महालय में पूजा होती है?
नहीं। आज यह खंडहर रूप में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित राष्ट्रीय महत्व का स्मारक है और यहाँ नियमित पूजा नहीं होती।
सिद्धपुर में और क्या देखें?
सिद्धपुर का बिंदु सरोवर मातृ श्राद्ध के लिए प्रसिद्ध है और इसे पाँच पवित्र सरोवरों में गिना जाता है। नगर सरस्वती नदी के तट पर बसा है और यहाँ की पुरानी बोहरा हवेलियाँ भी प्रसिद्ध हैं।

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