ईएमई मंदिर, जिसे दक्षिणामूर्ति मंदिर भी कहते हैं, गुजरात के वडोदरा शहर में भारतीय सेना की ईएमई (इलेक्ट्रॉनिक्स एवं मैकेनिकल इंजीनियर्स) स्कूल के परिसर में स्थित भगवान शिव का अनोखा मंदिर है। एल्युमिनियम की चादरों से ढका इसका गोल गुंबद इसे देश के सबसे अलग दिखने वाले मंदिरों में शामिल करता है। सेना द्वारा बनाया और संभाला जाने वाला यह मंदिर सर्वधर्म समभाव के प्रतीकों के लिए भी जाना जाता है।
निर्माण का इतिहास
मंदिर का निर्माण फरवरी 1966 में ईएमई स्कूल के पहले कमांडेंट ब्रिगेडियर ए. एफ. यूजीन के कार्यकाल में हुआ। आज भी इसकी देखरेख ईएमई स्कूल ही करती है। वर्ष 2023 में मेजर जनरल नीरज वार्ष्णेय की देखरेख में परिसर में अलग नवग्रह मंदिर बनाया गया, जहाँ नौ ग्रहों की पूजा होती है।
मंदिर और विग्रह
मुख्य विग्रह भगवान दक्षिणामूर्ति का है – शिव का वह स्वरूप जो गुरु रूप में ज्ञान देते हैं। मंदिर का ढाँचा अमेरिकी वास्तुकार बकमिन्स्टर फ़ुलर के जियोडेसिक गुंबद से प्रेरित है और बाहर से एल्युमिनियम की चादरों से ढका है, इसलिए धूप में यह चमकता दिखता है।
सर्वधर्म प्रतीक
- कलश – हिंदू धर्म
- गुंबद – इस्लामी स्थापत्य से लिया गया
- शिखर-टावर – ईसाई धर्म
- टावर पर स्वर्णिम संरचना – बौद्ध परंपरा
- प्रवेश द्वार – जैन परंपरा
- हवन कुंड (अग्नि) – पारसी (ज़रथुस्त्री) परंपरा
दर्शन से पहले जानें
मंदिर सैन्य छावनी क्षेत्र में है, इसलिए प्रवेश के समय पहचान पत्र माँगा जा सकता है और अंदर फोटोग्राफी सामान्यतः वर्जित रहती है। कुछ स्रोतों के अनुसार किसी विशेष दिन मंदिर बंद भी रहता है, इसलिए जाने से पहले स्थानीय रूप से समय की पुष्टि कर लें। वडोदरा में लक्ष्मी विलास पैलेस और सयाजी बाग भी देखे जा सकते हैं।
दर्शन का समय
- दर्शन: सुबह लगभग 6:30 से रात लगभग 8:30 बजे तक
मंदिर सैन्य परिसर में है, इसलिए समय और प्रवेश नियम बदल सकते हैं – जाने से पहले स्थानीय रूप से पुष्टि कर लें।
मुख्य आकर्षण
- जियोडेसिक गुंबद – एल्युमिनियम की चादरों से ढकी अनोखी संरचना।
- भगवान दक्षिणामूर्ति का विग्रह।
- सर्वधर्म प्रतीक – कलश, गुंबद, शिखर, प्रवेश द्वार और हवन कुंड में अलग-अलग धर्मों की झलक।
- 2023 में बना नवग्रह मंदिर।
कैसे पहुँचें
- रेल मार्ग: वडोदरा जंक्शन से कुछ किलोमीटर; ऑटो और टैक्सी उपलब्ध।
- सड़क मार्ग: शहर के छावनी (ईएमई स्कूल) क्षेत्र में।
- हवाई मार्ग: वडोदरा हवाई अड्डा, शहर के भीतर।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ईएमई मंदिर किस देवता को समर्पित है?
ईएमई मंदिर किसने बनवाया?
ईएमई मंदिर की बनावट अनोखी क्यों है?
ईएमई मंदिर में सर्वधर्म प्रतीक कौन से हैं?
क्या ईएमई मंदिर में फोटोग्राफी की अनुमति है?
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
-
Botad, गुजरात कष्टभंजन हनुमान मंदिर, सालंगपुर श्री कष्टभंजन देव हनुमानजी
-
द्वारका, गुजरात श्री केशवरायजी मंदिर, बेट द्वारका श्री केशवरायजी (भगवान श्रीकृष्ण)
-
Kutch, गुजरात लखेश्वर शिव मंदिर, केरा (कच्छ) भगवान शिव (लखेश्वर महादेव)
-
द्वारका, गुजरात श्री द्वारकाधीश मंदिर, द्वारका भगवान श्रीकृष्ण (द्वारकाधीश)
-
द्वारका, गुजरात नवलखा मंदिर, घुमली सूर्य देव (मंदिर अब खंडहर अवस्था में)
-
बनासकांठा, गुजरात अंबाजी मंदिर, बनासकांठा माँ अंबा (श्री वीसा यंत्र); भैरव – बटुक