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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas

गढ़कालिका मंदिर, उज्जैन

Gadkalika (Garh Kalika) Temple, Ujjain

उज्जैन, मध्य प्रदेश माँ गढ़कालिका (महाकाली) निःशुल्क प्रवेश

गढ़कालिका मंदिर मध्य प्रदेश के उज्जैन नगर में शिप्रा नदी के पास, प्राचीन गढ़ (किले) वाले क्षेत्र में स्थित माँ कालिका का मंदिर है। आदि शंकराचार्य से जुड़े अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्र में “उज्जयिन्यां महाकाली” कहा गया है – इस क्रम में उज्जैन का पीठ अष्टादश महाशक्तिपीठों में नौवाँ है, और अधिकतर अष्टादश सूचियाँ इसे गढ़कालिका से जोड़ती हैं। यह मंदिर महाकवि कालिदास की आराध्य देवी के रूप में भी प्रसिद्ध है।

कालिदास और गढ़कालिका

लोक परंपरा के अनुसार कालिदास आरंभ में साधारण बुद्धि के माने जाते थे, पर माँ गढ़कालिका की अनन्य भक्ति से उन्हें अद्भुत काव्य प्रतिभा मिली। इसी कारण कवि और विद्यार्थी यहाँ विद्या और वाणी का आशीर्वाद माँगने आते हैं। उज्जैन में होने वाले कालिदास समारोह से पहले यहाँ देवी की पूजा की परंपरा भी बताई जाती है।

मंदिर और इतिहास

गर्भगृह में माँ गढ़कालिका का प्राचीन विग्रह है, जिसे मंदिर से भी पुराना माना जाता है। परंपरा के अनुसार मंदिर का पहला ज्ञात जीर्णोद्धार 7वीं शताब्दी में थानेश्वर के सम्राट हर्षवर्धन ने करवाया, और मंदिर का वर्तमान स्वरूप ग्वालियर रियासत के समय का माना जाता है। “गढ़” नाम उस प्राचीन किले वाले क्षेत्र से आया है जहाँ पुरानी अवंतिका नगरी की बस्ती होने की बात कही जाती है।

स्थान को लेकर मत

उज्जैन के शक्तिपीठ को लेकर दो परंपराएँ हैं। अष्टादश शक्तिपीठों की अधिकतर सूचियाँ “उज्जयिन्यां महाकाली” को गढ़कालिका मानती हैं, और कुछ परंपराएँ यहाँ सती के ऊपरी होंठ के गिरने की बात कहती हैं। वहीं 51 शक्तिपीठों की परंपरा प्रायः उज्जैन के पीठ को महाकाल के पास स्थित हरसिद्धि माता मंदिर में मानती है, जहाँ सती की कोहनी गिरने की मान्यता है। उज्जैन आने वाले श्रद्धालु प्रायः दोनों देवियों के दर्शन करते हैं।

प्रमुख उत्सव

  • चैत्र और शारदीय नवरात्रि: विशेष श्रृंगार, हवन और भारी भीड़।
  • सिंहस्थ कुंभ के समय लाखों श्रद्धालु दर्शन करते हैं।

आसपास के दर्शन

गढ़कालिका के आसपास भर्तृहरि गुफा, काल भैरव मंदिर और शिप्रा के घाट हैं। उसी यात्रा में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, हरसिद्धि माता मंदिर और मंगलनाथ मंदिर के दर्शन भी किए जा सकते हैं।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सामान्यतः सुबह जल्दी से रात लगभग 9:00 बजे तक

नवरात्रि में समय बढ़ाया जाता है और भीड़ अधिक रहती है।

मुख्य आकर्षण

  • माँ गढ़कालिका – प्राचीन विग्रह, जिसे मंदिर से भी पुराना माना जाता है।
  • कालिदास की परंपरा – महाकवि की आराध्य देवी के रूप में प्रसिद्ध।
  • प्राचीन गढ़ क्षेत्र – जहाँ पुरानी अवंतिका की बस्ती के अवशेष मिलने की बात कही जाती है।
  • पास में भर्तृहरि गुफा, काल भैरव मंदिर और शिप्रा तट।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: उज्जैन जंक्शन (लगभग 5 किमी) – देश के कई शहरों से ट्रेनें।
  • सड़क मार्ग: महाकाल मंदिर से ऑटो या ई-रिक्शा द्वारा; इंदौर से उज्जैन लगभग 55 किमी।
  • हवाई मार्ग: देवी अहिल्याबाई होलकर हवाई अड्डा, इंदौर।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गढ़कालिका मंदिर अष्टादश शक्तिपीठों में किस स्थान पर है?
आदि शंकराचार्य से जुड़े अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्र में "उज्जयिन्यां महाकाली" कहा गया है। इस क्रम में यह नौवाँ पीठ है, और अधिकतर अष्टादश सूचियाँ इसे उज्जैन के गढ़कालिका मंदिर से जोड़ती हैं।
क्या हरसिद्धि मंदिर भी उज्जैन का शक्तिपीठ है?
हाँ, 51 शक्तिपीठों की परंपरा प्रायः उज्जैन के शक्तिपीठ को हरसिद्धि माता मंदिर में मानती है। अष्टादश परंपरा की "महाकाली" को अधिकतर गढ़कालिका से जोड़ा जाता है। श्रद्धालु दोनों देवियों के दर्शन करते हैं।
गढ़कालिका और कालिदास का क्या संबंध है?
लोक परंपरा के अनुसार महाकवि कालिदास माँ गढ़कालिका के अनन्य भक्त थे और देवी की कृपा से ही उन्हें काव्य प्रतिभा मिली। कालिदास समारोह से पहले यहाँ देवी की पूजा की परंपरा भी बताई जाती है।
गढ़कालिका शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
कुछ परंपराएँ यहाँ सती के ऊपरी होंठ के गिरने की बात कहती हैं, जबकि अन्य स्रोत उज्जैन के पीठ को कोहनी से जोड़कर हरसिद्धि मानते हैं। इस विषय में स्रोत एकमत नहीं हैं।
गढ़कालिका मंदिर का जीर्णोद्धार किसने करवाया?
परंपरा के अनुसार इसका पहला ज्ञात जीर्णोद्धार 7वीं शताब्दी में थानेश्वर के सम्राट हर्षवर्धन ने करवाया था। मंदिर का वर्तमान स्वरूप ग्वालियर रियासत के समय का माना जाता है।

गढ़कालिका मंदिर, उज्जैन इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

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