अयोध्या में सरयू के गोलाघाट पर स्थित श्री रामस्वामी मंदिर, जिसे लोग अम्माजी मंदिर कहते हैं, दक्षिण भारतीय शैली का एक राम मंदिर है। दक्षिण भारत की श्रीवैष्णव परंपरा में भगवान विष्णु के 108 दिव्य देशम माने जाते हैं – वे धाम जिनकी स्तुति आलवार संतों ने तमिल भाषा में की। इनमें श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या तिरुअयोध्या नाम से शामिल है, और अम्माजी मंदिर को इस दिव्य देशम का प्रतिनिधि मंदिर माना जाता है। ध्यान रहे, यह राम जन्मभूमि मंदिर से अलग मंदिर है।
आलवार और तिरुअयोध्या
आलवार 6वीं से 9वीं शताब्दी के बीच तमिलनाडु में हुए वैष्णव भक्त-कवि थे, जिनके लगभग चार हज़ार पद नालायिर दिव्य प्रबंधम में संकलित हैं। इनमें से पाँच आलवारों – पेरियाऴ्वार, कुलशेखर आऴ्वार, तोण्डरडिप्पोडि आऴ्वार, तिरुमंगै आलवार और नम्माऴ्वार – ने अयोध्या और श्रीराम का गुणगान किया है। इस परंपरा में दिव्य देशम पूरी अयोध्या नगरी है; यहाँ भगवान श्रीराम (चक्रवर्ती तिरुमगन) और देवी सीता के रूप में पूजे जाते हैं, और सरयू को यहाँ का तीर्थ माना जाता है।
मंदिर का इतिहास
मंदिर समिति के अनुसार इसकी स्थापना 1904 में योगी पार्थसारथी अय्यंगार ने की थी। श्रीवैष्णव स्रोतों में कथा मिलती है कि स्वप्न में श्रीराम ने उन्हें तमिलनाडु के तिरुप्पुल्लाणि (दर्भशयनम दिव्य देशम) से राम विग्रह लाकर अयोध्या में स्थापित करने का आदेश दिया। बताया जाता है कि उनकी पत्नी अम्माजी के नाम से प्रसिद्ध थीं, इसलिए मंदिर भी अम्माजी मंदिर कहलाया। आज भी इसकी व्यवस्था चेन्नई के तिरुवल्लिक्केणि स्थित श्री सरस्वती भंडारम समिति करती है।
मंदिर और पूजा-पद्धति
उत्तर भारत के मंदिरों से अलग, यहाँ पूजा पांचरात्र आगम और रामानुजाचार्य की श्रीवैष्णव परंपरा के अनुसार दक्षिण भारतीय विधि से होती है। गर्भगृह में श्रीराम और सीता के साथ नम्माऴ्वार, तिरुमंगै आलवार, रामानुजाचार्य (उडयवर) और मणवाळ मामुनि के विग्रह भी विराजते हैं। दक्षिण भारत से अयोध्या आने वाले श्रीवैष्णव यात्री यहाँ दर्शन अवश्य करते हैं।
ब्रह्मोत्सव
मंदिर का वार्षिक श्री रामस्वामी ब्रह्मोत्सव ध्वजारोहण से शुरू होता है। उत्सव के दिनों में भगवान की उत्सव मूर्ति हनुमान, गरुड़, गज और शेष वाहनों पर अयोध्या की गलियों में परिक्रमा करती है, और अंतिम दिन सरयू में तीर्थवारी (पवित्र स्नान) होता है। उत्सव के दिनों में दक्षिण भारत से आए श्रीवैष्णव यात्रियों के ठहरने और भोजन की व्यवस्था भी की जाती रही है।
यात्रा सुझाव
मंदिर गोलाघाट पर निर्मोचन चौराहे के पास है। अयोध्या आने वाले यात्री राम जन्मभूमि मंदिर, हनुमानगढ़ी, कनक भवन और सरयू घाट के साथ अम्माजी मंदिर के दर्शन एक ही दिन में कर सकते हैं। उत्तर प्रदेश के दूसरे दिव्य देशम – नैमिषारण्य, मथुरा और गोकुल – भी इसी यात्रा में जोड़े जा सकते हैं।
दर्शन का समय
- सुबह: लगभग 8:00 से दोपहर 12:00 बजे तक
- शाम: लगभग 4:00 से शाम 7:00 बजे तक
समय स्रोतों में अलग-अलग बताया गया है; जाने से पहले स्थानीय रूप से पुष्टि कर लें।
मुख्य आकर्षण
- श्रीराम और सीता – दक्षिण भारतीय श्रीवैष्णव विधि से पूजित मूल और उत्सव विग्रह।
- नम्माऴ्वार, तिरुमंगै आलवार, रामानुजाचार्य और मणवाळ मामुनि के विग्रह।
- सरयू नदी का गोलाघाट।
- ब्रह्मोत्सव के दिनों में वाहन सेवा और नगर परिक्रमा।
कैसे पहुँचें
- रेल मार्ग: अयोध्या धाम जंक्शन और अयोध्या कैंट (फ़ैज़ाबाद) स्टेशन।
- सड़क मार्ग: लखनऊ से लगभग 135 किमी; लखनऊ, गोरखपुर और प्रयागराज से बसें और टैक्सी।
- हवाई मार्ग: महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, अयोध्या धाम।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या अम्माजी मंदिर और राम जन्मभूमि मंदिर एक ही हैं?
दिव्य देशम क्या होते हैं और अयोध्या उनमें क्यों है?
किन आलवारों ने अयोध्या की स्तुति की?
इसे अम्माजी मंदिर क्यों कहते हैं?
अम्माजी मंदिर में कौन-सा बड़ा उत्सव होता है?
श्री रामस्वामी मंदिर (अम्माजी मंदिर), अयोध्या इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
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मथुरा, उत्तर प्रदेश श्रीकृष्ण जन्मभूमि, मथुरा भगवान श्रीकृष्ण (केशवदेव)
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अयोध्या, उत्तर प्रदेश श्री राम जन्मभूमि मंदिर, अयोध्या भगवान श्रीराम (रामलला)
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वाराणसी, उत्तर प्रदेश विशालाक्षी मंदिर, वाराणसी माँ विशालाक्षी; भैरव – काल भैरव
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प्रयागराज, उत्तर प्रदेश ललिता देवी शक्तिपीठ, मीरापुर प्रयागराज माँ ललिता देवी; भैरव – भव
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वृंदावन, उत्तर प्रदेश कात्यायनी शक्तिपीठ, वृंदावन माँ कात्यायनी (उमा); भैरव – भूतेश
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सीतापुर, उत्तर प्रदेश श्री नैमिषनाथ विष्णु मंदिर (देवराज पेरुमाल), नैमिषारण्य भगवान नैमिषनाथ / देवराज पेरुमाल (विष्णु), देवी हरिलक्ष्मी (पुण्डरीकवल्ली थायार)