उत्तर प्रदेश के सीतापुर ज़िले में गोमती नदी के बाएँ तट पर बसा नैमिषारण्य (नीमसार) वह पावन वन है जहाँ सूत जी ने ऋषियों को पुराणों की कथा सुनाई थी। यहाँ का श्री नैमिषनाथ विष्णु मंदिर – जिसे देवराज पेरुमाल मंदिर, नैमिषनारायण मंदिर या रामानुज कोट भी कहते हैं – दक्षिण भारत की श्रीवैष्णव परंपरा के 108 दिव्य देशमों में तिरुनैमिषारण्यम के नाम से गिना जाता है। इस धाम की स्तुति तिरुमंगै आलवार ने की है।
दिव्य देशम के रूप में नैमिषारण्य
दिव्य देशम भगवान विष्णु के वे धाम हैं जिनकी स्तुति तमिलनाडु के आलवार संतों ने नालायिर दिव्य प्रबंधम में की। इस परंपरा में दिव्य देशम केवल मंदिर नहीं, बल्कि पूरा नैमिष वन है – मान्यता है कि भगवान स्वयं इस वन के रूप में विराजते हैं, इसलिए यहाँ की पूजा पूरे वन की आराधना मानी जाती है। यहाँ भगवान देवराज पेरुमाल (श्रीहरि) और देवी हरिलक्ष्मी (पुण्डरीकवल्ली) के रूप में पूजे जाते हैं। नैमिषारण्य उन आठ स्वयं-व्यक्त क्षेत्रों में भी है जहाँ भगवान स्वयं प्रकट हुए माने जाते हैं।
पौराणिक कथा
मंदिर से जुड़ी कथा के अनुसार वृत्रासुर ने इंद्र को देवलोक से निकाल दिया था और उसे वरदान था कि किसी ज्ञात अस्त्र से उसकी मृत्यु नहीं होगी। ब्रह्मा की सलाह पर इंद्र ने नैमिष वन में भगवान विष्णु की तपस्या की। भगवान ने बताया कि केवल महर्षि दधीचि की अस्थियों से बना अस्त्र ही वृत्र को मार सकता है। दधीचि ने देह-त्याग किया और उनकी रीढ़ से बने वज्र से इंद्र ने वृत्र का वध किया। परंपरा के अनुसार यहीं महर्षि सूत ने पुराण-कथा सुनाई, और यहाँ आदि शंकराचार्य के आगमन तथा कवि सूरदास के निवास की भी मान्यता है।
आलवार और दिव्य प्रबंधम
नैमिषारण्य की स्तुति करने वाले एकमात्र आलवार तिरुमंगै आलवार हैं। उन्होंने अपने ग्रंथ पेरिय तिरुमोऴि के आरंभिक भाग में दस पाशुरमों का एक पूरा दशक यहाँ के भगवान को समर्पित किया है। इसीलिए दक्षिण भारत से उत्तर भारत की दिव्य देशम यात्रा करने वाले श्रीवैष्णव यात्री नैमिषारण्य अवश्य आते हैं।
चक्रतीर्थ और आसपास के दर्शन
- चक्रतीर्थ (चक्र कुंड): मंदिर से लगभग 600 मीटर दूर, जिसमें भूमि से निरंतर जल निकलता है। हर अमावस्या, विशेषकर सोमवती अमावस्या को यहाँ स्नान का बड़ा महत्व है।
- ललिता देवी मंदिर: चक्रतीर्थ स्नान के बाद यहाँ दर्शन की परंपरा है।
- गोमती नदी के घाट और व्यास गद्दी।
- पास का मिश्रिख, जो महर्षि दधीचि की कथा से जुड़ा है।
यात्रा सुझाव
नैमिषारण्य सीतापुर से लगभग 32 किमी दूर है और लखनऊ से सड़क मार्ग द्वारा एक दिन में आराम से आया-जाया जा सकता है। अमावस्या और पूर्णिमा पर भीड़ बहुत रहती है, इसलिए शांत दर्शन के लिए सामान्य दिनों में सुबह जल्दी पहुँचें।
दर्शन का समय
- सुबह: लगभग 6:00 से दोपहर 12:00 बजे तक
- शाम: लगभग 4:00 से रात 8:00 बजे तक
अमावस्या और पूर्णिमा पर भीड़ बहुत अधिक रहती है।
मुख्य आकर्षण
- नैमिषनाथ / देवराज पेरुमाल और हरिलक्ष्मी का मंदिर।
- चक्रतीर्थ (चक्र कुंड) – मंदिर से थोड़ी दूरी पर पवित्र कुंड।
- गोमती नदी का तट।
- ललिता देवी मंदिर, व्यास गद्दी और आसपास के अनेक प्राचीन स्थल।
कैसे पहुँचें
- रेल मार्ग: नैमिषारण्य के पास छोटा स्टेशन है; बड़े स्टेशन सीतापुर और लखनऊ हैं।
- सड़क मार्ग: सीतापुर से लगभग 32 किमी; लखनऊ से सीतापुर या संडीला होकर बस और टैक्सी।
- हवाई मार्ग: लखनऊ का चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
नैमिषारण्य को दिव्य देशम क्यों माना जाता है?
स्वयं-व्यक्त क्षेत्र का क्या अर्थ है?
किस आलवार ने नैमिषारण्य की स्तुति की?
चक्रतीर्थ का क्या महत्व है?
नैमिषारण्य लखनऊ से कैसे पहुँचें?
श्री नैमिषनाथ विष्णु मंदिर (देवराज पेरुमाल), नैमिषारण्य इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
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मथुरा, उत्तर प्रदेश श्रीकृष्ण जन्मभूमि, मथुरा भगवान श्रीकृष्ण (केशवदेव)
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अयोध्या, उत्तर प्रदेश श्री राम जन्मभूमि मंदिर, अयोध्या भगवान श्रीराम (रामलला)
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वाराणसी, उत्तर प्रदेश विशालाक्षी मंदिर, वाराणसी माँ विशालाक्षी; भैरव – काल भैरव
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प्रयागराज, उत्तर प्रदेश ललिता देवी शक्तिपीठ, मीरापुर प्रयागराज माँ ललिता देवी; भैरव – भव
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वृंदावन, उत्तर प्रदेश कात्यायनी शक्तिपीठ, वृंदावन माँ कात्यायनी (उमा); भैरव – भूतेश
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मथुरा, उत्तर प्रदेश नवमोहन कृष्ण मंदिर (तिरुवाय्प्पाडि), गोकुल भगवान नवमोहन कृष्ण (बाल कृष्ण), देवी रुक्मिणी और सत्यभामा