रामगिरि शक्तिपीठ उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर बसे पावन तीर्थ चित्रकूट में माना जाता है। इसकी गिनती 51 शक्तिपीठों में होती है। मान्यता है कि यहाँ सती का दायाँ स्तन गिरा था। यहाँ की शक्ति शिवानी और भैरव चंड हैं – पीठ निर्णय तंत्र में भी रामगिरि, शिवानी और चंड भैरव का उल्लेख मिलता है। स्थानीय लोग इसे शिवानी शक्तिपीठ भी कहते हैं।
शिवानी रूप में देवी
रामगिरि में सती की आराधना माँ शिवानी के रूप में होती है – अर्थात् शिव की शक्ति। भगवान शिव यहाँ चंड भैरव के रूप में पीठ के रक्षक माने जाते हैं। श्रद्धालु यहाँ संतान, सुख-समृद्धि और कष्टों से मुक्ति की कामना लेकर आते हैं। देवी के दर्शन के साथ भैरव के दर्शन करना भी आवश्यक माना जाता है।
रामगिरि और श्रीराम का वनवास
मान्यता है कि वनवास के समय श्रीराम, सीता और लक्ष्मण ने चित्रकूट में निवास किया था, इसलिए यहाँ की पहाड़ियों को “रामगिरि” कहा गया। कामदगिरि पर्वत को भी रामगिरि शक्तिपीठ से जोड़ा जाता है। श्रद्धालु इस पर्वत की लगभग 5 किमी लंबी परिक्रमा करते हैं, जिसके मार्ग में अनेक छोटे-बड़े मंदिर हैं। मंदाकिनी नदी का रामघाट, जानकी कुंड और स्फटिक शिला भी यात्रियों के प्रमुख दर्शन-स्थल हैं।
स्थान को लेकर मत
रामगिरि शक्तिपीठ के सटीक स्थान पर एकमत नहीं है। एक मत इसे चित्रकूट के रामगिरि क्षेत्र में मानता है, और चित्रकूट में भी कुछ लोग कामदगिरि को तो कुछ यहाँ के शारदा मंदिर को पीठ मानते हैं। दूसरा प्रचलित मत मध्य प्रदेश के मैहर में त्रिकूट पर्वत पर स्थित माँ शारदा मंदिर को रामगिरि शक्तिपीठ मानता है। कुछ ग्रंथों में यहाँ गिरे अंग को स्तन के बजाय नितंब की हड्डी भी बताया गया है।
प्रमुख उत्सव
- चैत्र और शारदीय नवरात्रि: देवी की विशेष पूजा और भीड़।
- अमावस्या: चित्रकूट में कामदगिरि परिक्रमा के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
- दीपावली पर चित्रकूट में विशेष मेला लगता है।
यात्रा सुझाव
चित्रकूट में आश्रम, धर्मशालाएँ और होटल आसानी से मिल जाते हैं। कामदगिरि परिक्रमा सुबह जल्दी शुरू करना अच्छा रहता है। अक्टूबर से मार्च तक का मौसम यात्रा के लिए सबसे अनुकूल है; गर्मियों में यहाँ बहुत गर्मी पड़ती है।
दर्शन का समय
- दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से रात 8:00 बजे तक
समय स्थानीय रूप से बदल सकता है। नवरात्रि में भीड़ अधिक रहती है।
मुख्य आकर्षण
- माँ शिवानी – रामगिरि शक्तिपीठ की देवी।
- कामदगिरि पर्वत – लगभग 5 किमी की परिक्रमा।
- रामघाट – मंदाकिनी नदी का प्रमुख घाट।
- जानकी कुंड, स्फटिक शिला और गुप्त गोदावरी।
कैसे पहुँचें
- रेल मार्ग: चित्रकूट धाम (कर्वी) रेलवे स्टेशन, कामदगिरि से लगभग 10 किमी।
- सड़क मार्ग: प्रयागराज, सतना और बाँदा से चित्रकूट के लिए बसें और टैक्सी।
- हवाई मार्ग: प्रयागराज हवाई अड्डा (लगभग 130 किमी) या खजुराहो।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
रामगिरि शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
रामगिरि शक्तिपीठ कहाँ है?
क्या मैहर का शारदा देवी मंदिर ही रामगिरि शक्तिपीठ है?
चित्रकूट का रामायण से क्या संबंध है?
चित्रकूट कैसे पहुँचें?
रामगिरि शक्तिपीठ (माँ शिवानी), चित्रकूट इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
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मथुरा, उत्तर प्रदेश श्रीकृष्ण जन्मभूमि, मथुरा भगवान श्रीकृष्ण (केशवदेव)
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अयोध्या, उत्तर प्रदेश श्री राम जन्मभूमि मंदिर, अयोध्या भगवान श्रीराम (रामलला)
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वाराणसी, उत्तर प्रदेश विशालाक्षी मंदिर, वाराणसी माँ विशालाक्षी; भैरव – काल भैरव
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प्रयागराज, उत्तर प्रदेश ललिता देवी शक्तिपीठ, मीरापुर प्रयागराज माँ ललिता देवी; भैरव – भव
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वृंदावन, उत्तर प्रदेश कात्यायनी शक्तिपीठ, वृंदावन माँ कात्यायनी (उमा); भैरव – भूतेश
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सीतापुर, उत्तर प्रदेश श्री नैमिषनाथ विष्णु मंदिर (देवराज पेरुमाल), नैमिषारण्य भगवान नैमिषनाथ / देवराज पेरुमाल (विष्णु), देवी हरिलक्ष्मी (पुण्डरीकवल्ली थायार)