ॐ जय गुरुदेव हरे, ॐ जय गुरुदेव हरे,
दीनजनों के संकट, तुम गुरु दूर करें ,

पुण्य पयोनिधि पावन, आलरी की धरती,
हर्ष विभोर धरा ने, गोदी निज भर दी ,

लता पुष्प लहराये, सरस समय आया,
सुमन गंध अंजलि भर, श्रद्धानत लाया ,

एक अलौकिक क्षण था, बिखरी नव आभा ,
गुरु के चरण परत ही, दुख विषाद भागा ,

रुकमणी अंक किलोलित, उदय गोद खेले,
प्रमोदित मात-पिता हो, बालक चाल चले ,

दामोदर कुल हर्षित, गुरु प्रसाद पाया ,
पावन स्वर गुरुवर का नवजीवन लाया ,

कलि कुल कलुष सने है, मुक्ति कौन करे,
अगम भाव भावन को, अभिनव आन धरे ,

कलयुग कलुष मिटाने, कड़छा मन भाया ,
साधि साधना तुमने, हटि गहन माया ,

जान अकिंचन हमको, ज्ञान चक्षु दे दो ,
भव सागर तर जावें, बीज मंत्र कह दो ,

शरण पड़े हम तेरी, अवलंबन प्रभु दो ,
उभय लोक सुखकारी, वरद हस्त धर दो ,

हीरा तो पत्थर हैं, चमक तुम्हीं देते ,
मोह जड़ित जड़ मन को, ज्योतित कर देते ,

विनय भाव जो जन, गुरु महिमा गावे ,
आनंदित हो जीवन, भव से तर जावे ,

ॐ जय गुरुदेव हरे, ॐ जय गुरुदेव हरे ,
दीनजनों के संकट, तुम गुरु दूर करें ,

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