मन रे पासि हरि के चरन
मन रे पासि हरि के चरन। सुभग सीतल कमल- कोमल त्रिविध – ज्वाला- हरन। जो चरन प्रह्मलाद परसे इंद्र- पद्वी- हान।। जिन चरन ध्रुव अटल कींन्हों राखि अपनी सरन। जिन चरन ब्राह्मांड मेंथ्यों नखसिखौ श्री...
श्री कृष्ण जी के मधुर भजन, गीत और लीलाएँ! राधा-कृष्ण प्रेम की दिव्य अनुभूति। सभी भक्ति गीत BhaktiRas.in पर।
मन रे पासि हरि के चरन। सुभग सीतल कमल- कोमल त्रिविध – ज्वाला- हरन। जो चरन प्रह्मलाद परसे इंद्र- पद्वी- हान।। जिन चरन ध्रुव अटल कींन्हों राखि अपनी सरन। जिन चरन ब्राह्मांड मेंथ्यों नखसिखौ श्री...
प्रभु जी तुम दर्शन बिन मोय घड़ी चैन नहीं आवड़े।।टेक।। अन्न नहीं भावे नींद न आवे विरह सतावे मोय।घायल ज्यूं घूमूं खड़ी रे म्हारो दर्द न जाने कोय।।१।।दिन तो खाय गमायो री, रैन गमाई सोय।प्राण...
तनक हरि चितवौ जी मोरी ओर।हम चितवत तुम चितवत नाहींमन के बड़े कठोर।मेरे आसा चितनि तुम्हरीऔर न दूजी ठौर।तुमसे हमकूँ एक हो जीहम-सी लाख करोर।।कब की ठाड़ी अरज करत हूँअरज करत भै भोर।मीरा के प्रभु...
दरस बिन दूखण लागे नैन।जबसे तुम बिछुड़े प्रभु मोरे, कबहुं न पायो चैन।सबद सुणत मेरी छतियां, कांपै मीठे लागै बैन।बिरह व्यथा कांसू कहूं सजनी, बह गई करवत ऐन।कल न परत पल हरि मग जोवत, भई...
बरसै बदरिया सावन कीसावन की मनभावन की।सावन में उमग्यो मेरो मनवाभनक सुनी हरि आवन की।उमड़ घुमड़ चहुँ दिसि से आयोदामण दमके झर लावन की।नान्हीं नान्हीं बूंदन मेहा बरसैसीतल पवन सोहावन की।मीराके प्रभु गिरधर नागरआनंद मंगल...
बसो मोरे नैनन में नंदलाल।मोहनी मूरति सांवरि सूरति, नैणा बने बिसाल।अधर सुधारस मुरली राजत, उर बैजंती-माल।।छुद्र घंटिका कटि तट सोभित, नूपुर सबद रसाल।मीरा प्रभु संतन सुखदाई, भगत बछल गोपाल।।
प्रभुजी मैं अरज करुँ छूं म्हारो बेड़ो लगाज्यो पार।।इण भव में मैं दुख बहु पायो संसा-सोग निवार।अष्ट करम की तलब लगी है दूर करो दुख-भार।।यों संसार सब बह्यो जात है लख चौरासी री धार।मीरा के...
म्हारे घर होता जाज्यो राज।अबके जिन टाला दे जाओ सिर पर राखूं बिराज।।म्हे तो जनम जनमकी दासी थे म्हांका सिरताज।पावणड़ा म्हांके भलां ही पधारया सब ही सुघारण काज।।म्हे तो बुरी छां थांके भली छै घणेरी...
मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई।।जाके सिर मोर मुकुट मेरो पति सोई।तात मात भ्रात बंधु आपनो न कोई।।छांडि दई कुलकी कानि कहा करिहै कोई।संतन ढिग बैठि बैठि लोकलाज खोई।।चुनरी के किये टूक ओढ़ लीन्ही...
प्यारे दरसन दीज्यो आय, तुम बिन रह्यो न जाय।।जल बिन कमल, चंद बिन रजनी, ऐसे तुम देख्याँ बिन सजनी।आकुल व्याकुल फिरूँ रैन दिन, बिरह कालजो खाय।।दिवस न भूख, नींद नहिं रैना, मुख सूं कथत न...
स्वामी सब संसार के हो सांचे श्रीभगवान।।स्थावर जंगम पावक पाणी धरती बीज समान।सबमें महिमा थांरी देखी कुदरत के कुरबान।।बिप्र सुदामा को दालद खोयो बाले की पहचान।दो मुट्ठी तंदुलकी चाबी दीन्हयों द्रव्य महान।भारत में अर्जुन के...
सुण लीजो बिनती मोरी, मैं शरण गही प्रभु तेरी।तुम(तो) पतित अनेक उधारे, भव सागर से तारे।।मैं सबका तो नाम न जानूं कोइ कोई नाम उचारे।अम्बरीष सुदामा नामा, तुम पहुँचाये निज धामा।ध्रुव जो पाँच वर्ष के...