बासरी बजाय आज रंगसो मुरारी
बासरी बजाय आज रंगसो मुरारी ।शिव समाधि भूलि गयी मुनि मनकी तारी ॥ बा०॥ध्रु०॥बेद भनत ब्रह्मा भुले भूले ब्रह्मचरी ।सुनतही आनंद भयो लगी है करारी ॥ बास०॥१॥रंभा सब ताल चूकी भूमी नृत्य कारी ।यमुना जल...
श्री कृष्ण जी के मधुर भजन, गीत और लीलाएँ! राधा-कृष्ण प्रेम की दिव्य अनुभूति। सभी भक्ति गीत BhaktiRas.in पर।
बासरी बजाय आज रंगसो मुरारी ।शिव समाधि भूलि गयी मुनि मनकी तारी ॥ बा०॥ध्रु०॥बेद भनत ब्रह्मा भुले भूले ब्रह्मचरी ।सुनतही आनंद भयो लगी है करारी ॥ बास०॥१॥रंभा सब ताल चूकी भूमी नृत्य कारी ।यमुना जल...
देख देख एक बाला जोगी द्वारे मेरे आया हो ॥ध्रु०॥पीतपीतांबर गंगा बिराजे अंग बिभूती लगाया हो ।तीन नेत्र अरु तिलक चंद्रमा जोगी जटा बनाया हो ॥१॥भिछा ले निकसी नंदरानी मोतीयन थाल भराया हो ।ल्यो जोगी...
देखो माई हलधर गिरधर जोरी ॥ध्रु०॥हलधर हल मुसल कलधारे गिरधर छत्र धरोरी ॥देखो०॥१॥हलधर ओढे पित पितांबर गिरधर पीत पिछोरी ॥देखो०॥२॥हलधर केहे मेरी कारी कामरी गीरधरने ली चोरी ॥देखो०॥३॥सूरदास प्रभुकी छबि निरखे भाग बडे जीन कोरी...
नेक चलो नंदरानी उहां लगी नेक चलो नंदारानी ॥ध्रु०॥देखो आपने सुतकी करनी दूध मिलावत पानी ॥उ०॥१॥हमरे शिरकी नयी चुनरिया ले गोरसमें सानी ॥उ०॥२॥हमरे उनके करन बाद है हम देखावत जबानी ॥उ०॥३॥तुमरे कुलकी ऐशी बतीया सो...
ऐसे भक्ति मोहे भावे उद्धवजी ऐसी भक्ति ।सरवस त्याग मगन होय नाचे जनम करम गुन गावे ॥ उ०॥ध्रु०॥कथनी कथे निरंतर मेरी चरन कमल चित लावे ॥मुख मुरली नयन जलधारा करसे ताल बजावे ॥उ०॥१॥जहां जहां चरन...
दरसन बिना तरसत मोरी अखियां ॥ध्रु०॥तुमी पिया मोही छांड सीधारे फरकन लागी छतिया ॥द०॥१॥बस्ति छाड उज्जड किनी व्याकुल भई सब सखियां ॥द०॥२॥सूरदास कहे प्रभु तुमारे मिलनकूं ज्युजलंती मुख बतिया ॥द०॥३॥
सावरे मोकु रंगमें बोरी बोरी सांवरे मोकुं रंगमें बोरी बोरी ॥ध्रु०॥बहीयां पकर कर शीरकी गागरिया । छिन गागर ढोरी ।रंगमें रस बस मोकूं किनी । डारी गुलालनकी झोरी । गावत लागे मुखसे होरी ॥सा०॥१॥आयो अचानक...
जमुनाके तीर बन्सरी बजावे कानो ॥ज०॥ध्रु०॥बन्सीके नाद थंभ्यो जमुनाको नीर खग मृग।धेनु मोहि कोकिला अनें किर ॥बं०॥१॥सुरनर मुनि मोह्या रागसो गंभीर ।धुन सुन मोहि गोपि भूली आंग चीर ॥बं०॥२॥मारुत तो अचल भयो धरी रह्यो धीर...
नेननमें लागि रहै गोपाळ नेननमें ॥ध्रु०॥मैं जमुना जल भरन जात रही भर लाई जंजाल ॥ने०॥१॥रुनक झुनक पग नेपुर बाजे चाल चलत गजराज ॥ने०॥२॥जमुनाके नीर तीर धेनु चरावे संग लखो लिये ग्वाल ॥ने०॥३॥बिन देखे मोही कल...
मधुरीसी बेन बजायके । मेरो मन मोह्यो सांवरा ॥ध्रु०॥मेरे आंगनमें बांसको बेडलो सिंचो मन चित्त लायके ।अब तो बेरण भई बासरी मोहन मुखपर आयके ॥सां०॥१॥मैं जल जमुना भरन जातरी मारग रोक्यो आयके ।बनसीमें कछु आचरण...
हमसे छल कीनो काना नेनवा लगायके ॥ध्रु०॥जमुनाजलमें जीपें गेंद डारी कालि नागनाथ लाये ।इंद्रको गुमान हर्यो गोवरधन धारके ॥ह०॥१॥मोर मुगुट बांधे काली कामरी खांदे ।जमुनाजीमें ठाडो काना बासरी बजायके ॥ह०॥२॥देवकीको जायो काना आधिरेन गोकुल आयो...
शाम नृपती मुरली भई रानी ॥ध्रु०॥बन ते ल्याय सुहागिनी किनी । और नारी उनको न सोहानी ॥१॥कबहु अधर आलिंगन कबहु । बचन सुनन तनु दसा भुलानी ॥२॥सुरदास प्रभू तुमारे सरनकु । प्रेम नेमसे मिलजानी ॥३॥