मुरली कुंजनीनी कुंजनी बाजती
मुरली कुंजनीनी कुंजनी बाजती ॥ध्रु०॥सुनीरी सखी श्रवण दे अब तुजेही बिधि हरिमुख राजती ॥१॥करपल्लव जब धरत सबैलै सप्त सूर निकल साजती ॥२॥सूरदास यह सौती साल भई सबहीनके शीर गाजती ॥३॥
श्री कृष्ण जी के मधुर भजन, गीत और लीलाएँ! राधा-कृष्ण प्रेम की दिव्य अनुभूति। सभी भक्ति गीत BhaktiRas.in पर।
मुरली कुंजनीनी कुंजनी बाजती ॥ध्रु०॥सुनीरी सखी श्रवण दे अब तुजेही बिधि हरिमुख राजती ॥१॥करपल्लव जब धरत सबैलै सप्त सूर निकल साजती ॥२॥सूरदास यह सौती साल भई सबहीनके शीर गाजती ॥३॥
काहू जोगीकी नजर लागी है मेरो कुंवर । कन्हिया रोवे ॥ध्रु०॥घर घर हात दिखावे जशोदा दूध पीवे नहि सोवे ।चारो डांडी सरल सुंदर । पलनेमें जु झुलावे ॥मे०॥१॥मेरी गली तुम छिन मति आवो । अलख...
फुलनको महल फुलनकी सज्या फुले कुंजबिहारी । फुली राधा प्यारी ॥ध्रु०॥फुलेवे दंपती नवल मनन फुले फले करे केली न्यारी ॥१॥फुलीलता वेली विविधा सुमन गन फुले आवन दोऊं है सुखकारी ॥२॥सूरदास प्रभु प्यारपर बारत फुले फलचंपक...
रसिक सीर भो हेरी लगावत गावत राधा राधा नाम ॥ध्रु०॥कुंजभवन बैठे मनमोहन अली गोहन सोहन सुख तेरोई गुण ग्राम ॥१॥श्रवण सुनत प्यारी पुलकित भई प्रफुल्लित तनु मनु रोम राम सुखराशी बाम ॥२॥सूरदास प्रभु गिरीवर धरको...
तुमको कमलनयन कबी गलत ॥ध्रु०॥बदन कमल उपमा यह साची ता गुनको प्रगटावत ॥१॥सुंदर कर कमलनकी शोभा चरन कमल कहवावत ॥२॥और अंग कही कहा बखाने इतनेहीको गुन गवावत ॥३॥शाम मन अडत यह बानी बढ श्रवण सुनत...
महाराज भवानी ब्रह्म भुवनकी रानी ॥ध्रु०॥आगे शंकर तांडव करत है । भाव करत शुलपानी ॥ महा०॥१॥सुरनर गंधर्वकी भिड भई है । आगे खडा दंडपानी ॥ महा०॥२॥सुरदास प्रभु पल पल निरखत । भक्तवत्सल जगदानी ॥ महा०॥३॥
सुदामजीको देखत श्याम हसे सुदामजीको देखत० ॥ध्रु०॥हम तुम मित्र है बालपनके । अब तुम दूर बसे ॥ सुदामजी ॥१॥फाटीरे धोती टुटी पगडीयां । चालत पाव घसे ॥ सुदा०॥२॥भाभिजीने कुछ भेट पठाई । पोवे तीन पैसे...
कायकूं बहार परी । मुरलीया ॥ कायकू ब०॥ध्रु०॥जेलो तेरी ज्यानी पग पछानी । आई बनकी लकरी मुरलिया ॥ कायकु ब०॥१॥घडी एक करपर घडी एक मुखपर । एक अधर धरी मुरलिया ॥ कायकु ब०॥२॥कनक बासकी मंगावूं...
ऐसे संतनकी सेवा । कर मन ऐसे संतनकी सेवा ॥ध्रु०॥शील संतोख सदा उर जिनके । नाम रामको लेवा ॥ क०॥१॥आन भरोसो हृदय नहि जिनके । भजन निरंजन देवा ॥ क०॥२॥जीन मुक्त फिरे जगमाही । ज्यु...
हरि जनकू हरिनाम बडो धन हरि जनकू हरिनाम ॥ ध्रु०॥बिन रखवाले चोर नहि चोरत सुवत है सुख धाम ॥ ब०॥१॥दिन दीन होते सवाई दोढी धरत नहीं कछु दाम ॥ ब०॥२॥सुरदास दोढी धरत नहीं कछु दाम...
जयजय नारायण ब्रह्मपरायण श्रीपती कमलाकांत ॥ध्रु०॥नाम अनंत कहां लगी बरनुं शेष न पावे अंत ।शिव सनकादिक आदि ब्रह्मादिक सूर मुनिध्यान धरत ॥ जयजय० ॥१॥मच्छ कच्छ वराह नारसिंह प्रभु वामन रूप धरत ।परशुराम श्रीरामचंद्र भये लीला...
देखो ऐसो हरी सुभाव देखो ऐसो हरी सुभाव।बिनु गंभीर उदार उदधि प्रभु जानी शिरोमणी राव ॥ध्रु०॥बदन प्रसन्न कमलपद सुनमुख देखत है जैसे |बिमुख भयेकी कृपावा मुखकी फिरी चितवो तो तैसे ॥दे०॥१॥सरसो इतनी सेवाको फल मानत...