जनम सब बातनमें
जनम सब बातनमें बित गयोरे ॥ध्रु०॥बार बरस गये लडकाई । बसे जोवन भयो ।त्रिश बरस मायाके कारन देश बिदेश गयो ॥१॥चालीस अंदर राजकुं पायो बढे लोभ नित नयो ।सुख संपत मायाके कारण ऐसे चलत गयो...
श्री कृष्ण जी के मधुर भजन, गीत और लीलाएँ! राधा-कृष्ण प्रेम की दिव्य अनुभूति। सभी भक्ति गीत BhaktiRas.in पर।
जनम सब बातनमें बित गयोरे ॥ध्रु०॥बार बरस गये लडकाई । बसे जोवन भयो ।त्रिश बरस मायाके कारन देश बिदेश गयो ॥१॥चालीस अंदर राजकुं पायो बढे लोभ नित नयो ।सुख संपत मायाके कारण ऐसे चलत गयो...
सब दिन गये विषयके हेत सब दिन गये ॥गंगा जल छांड कूप जल पिवत हरि तजी पूजत प्रेत ॥ध्रु०॥जानि बुजी अपनो तन खोयो केस भये सब स्वेत ।श्रवण न सुनत नैनत देखत थके चरनके चेत...
बेर बेर नही आवे अवसर बेर बेर नही आवे ।जो जान तो करले भलाई जन्मोजन्म सुख पावे ॥ बरे०॥१॥धन जोबत अंजलीको पाणी बखणतां बेर नहीं लागे ।तन छुटे धन कोन कामको काहेकूं करनी कहावे ॥...
केत्ते गये जखमार भजनबिना केत्ते गये० ॥ध्रु०॥प्रभाते उठी नावत धोवत पालत है आचार ॥ भज०॥१॥दया धर्मको नाम न जाण्यो ऐसो प्रेत चंडाल ॥ भज०॥२॥आप डुबे औरनकूं डुबाये चले लोभकी लार ॥ भज०॥३॥माला छापा तिलक बनायो...
मन तोये भुले भक्ति बिसारी मन तो ये भुले भक्ति बिसारी ।शिरपर काल सदासर सांधत देखत बाजीहारी ॥ध्रु०॥कौन जमनातें सकृत कीनो मनुख देहधरी ।तामे नीच करम रंग रच्यो दुष्ट बासना धरी ॥ मन० ॥१॥बालपनें खेलनमें...
जय जय श्री बालमुकुंदा । मैं हूं चरण चरण रजबंदा ॥ध्रु०॥देवकीके घर जन्म लियो जद । छुट परे सब बंदा ॥ च०॥१॥मथुरा त्यजे हरि गोकुल आये । नाम धरे जदुनंदा ॥ च०॥२॥जमुनातीरपर कूद परोहै ।...
क्यौरे निंदभर सोया मुसाफर क्यौरे निंदभर सोया ॥ध्रु०॥मनुजा देहि देवनकु दुर्लभ जन्म अकारन खोया ॥ मुसा०॥१॥घर दारा जोबन सुत तेरा वामें मन तेरा मोह्या ॥ मुसा०॥२॥सूरदास प्रभु चलेही पंथकु पिछे नैनूं भरभर रोया ॥ मुसा०॥३॥
निरधनको धनि राम । हमारो०॥ध्रु०॥खान न खर्चत चोर न लूटत । साथे आवत काम ॥ह०॥१॥दिन दिन होत सवाई दीढी । खरचत को नहीं दाम ॥ह०॥२॥सूरदास प्रभु मुखमों आवत । और रसको नही काम हमारो०॥३॥
तबमें जानकीनाथ कहो ॥ध्रु०॥सागर बांधु सेना उतारो । सोनेकी लंका जलाहो ॥१॥तेतीस कोटकी बंद छुडावूं बिभिसन छत्तर धरावूं ॥२॥सूरदास प्रभु लंका जिती । सो सीता घर ले आवो॥३॥तबमें जानकीनाथ०॥
अद्भुत एक अनुपम बाग ॥ध्रु०॥जुगल कमलपर गजवर क्रीडत तापर सिंह करत अनुराग ॥१॥हरिपर सरवर गिरीवर गिरपर फुले कुंज पराग ॥२॥रुचित कपोर बसत ताउपर अमृत फल ढाल ॥३॥फलवर पुहूप पुहुपपर पलव तापर सुक पिक मृगमद काग...
कमलापती भगवान । मारो साईं कम०॥ध्रु०॥राम लछमन भरत शत्रुघन । चवरी डुलावे हनुमान ॥१॥मोर मुगुट पितांबर सोभे । कुंडल झलकत कान ॥२॥सूरदास प्रभु तुमारे मिलनकुं । दासाकुं वांको ध्यान॥३॥मारू सांई कमलापती० ॥
नारी दूरत बयाना रतनारे ॥ध्रु०॥जानु बंधु बसुमन बिसाल पर सुंदर शाम सीली मुख तारे ।रहीजु अलक कुटील कुंडलपर मोतन चितवन चिते बिसारे ।सिथील मोंह धनु गये मदन गुण रहे कोकनद बान बिखारे ।मुदेही आवत है...