उधो मनकी मनमें रही
उधो मनकी मनमें रही ॥ध्रु०॥गोकुलते जब मथुरा पधारे । कुंजन आग देही ॥१॥पतित अक्रूर कहासे आये । दुखमें दाग देही ॥२॥तन तालाभरना रही उधो । जल बल भस्म भई ॥३॥हमरी आख्या भर भर आवे ।...
श्री कृष्ण जी के मधुर भजन, गीत और लीलाएँ! राधा-कृष्ण प्रेम की दिव्य अनुभूति। सभी भक्ति गीत BhaktiRas.in पर।
उधो मनकी मनमें रही ॥ध्रु०॥गोकुलते जब मथुरा पधारे । कुंजन आग देही ॥१॥पतित अक्रूर कहासे आये । दुखमें दाग देही ॥२॥तन तालाभरना रही उधो । जल बल भस्म भई ॥३॥हमरी आख्या भर भर आवे ।...
अति सूख सुरत किये ललना संग जात समद मन्मथ सर जोरे ।राती उनीदे अलसात मरालगती गोकुल चपल रहतकछु थोरे ।मनहू कमलके को सते प्रीतम ढुंडन रहत छपी रीपु दल दोरे ।सजल कोप प्रीतमै सुशोभियत संगम...
रैन जागी पिया संग रंग मीनी ॥ध्रु०॥प्रफुल्लित मुख कंज नेन खजरीटमान मेन मिथुरी ।रहे चुरन कच बदन ओप किनी ॥१॥आतुर आलस जंभात पूलकीत अतिपान खाद मद ।माते तन मुधीन रही सीथल भई बेनी ॥२॥मांगते टरी...
खेलिया आंगनमें छगन मगन किजिये कलेवा ।छीके ते सारी दधी उपर तें कढी धरी पहीर ।लेवूं झगुली फेंटा बाँधी लेऊं मेवा ॥१॥गवालनके संग खेलन जाऊं खेलनके मीस भूषण ल्याऊं ।कौन परी प्यारे ललन नीसदीनकी ठेवा...
कोण गती ब्रिजनाथ । अब मोरी कोण गती ब्रिजनाथ ॥ध्रु०॥भजनबिमुख अरु स्मरत नही । फिरत विषया साथ ॥१॥हूं पतीत अपराधी पूरन । आचरु कर्म विकार ॥२॥काम क्रोध अरु लाभ । चित्रवत नाथ तुमही ॥३॥विकार अब...
मेरो मन अनत कहाँ सुख पावै।जैसे उड़ि जहाज की पंछी, फिरि जहाज पै आवै॥कमल-नैन को छाँड़ि महातम, और देव को ध्यावै।परम गंग को छाँड़ि पियासो, दुरमति कूप खनावै॥जिहिं मधुकर अंबुज-रस चाख्यो, क्यों करील-फल भावै।‘सूरदास’ प्रभु...
भोरहि सहचरि कातर दिठि हेरि छल छल लोचन पानि ।अनुखन राधा राधा रटइत आधा आधा बानि ।।राधा सयँ जब पनितहि माधव, माधव सयँ जब राधा ।दारुन प्रेम तबहि नहिं टूटत बाढ़त बिरह क बाधा ।।दुहुँ...
भाव भगति है जाकेंरास रस लीला गाइ सुनाऊं।यह जस कहै सुनै मुख स्त्रवननि तिहि चरनन सिर नाऊं॥कहा कहौं बक्ता स्त्रोता फल इक रसना क्यों गाऊं।अष्टसिद्धि नवनिधि सुख संपति लघुता करि दरसाऊं॥हरि जन दरस हरिहिं सम...
जसोदा हरि पालनैं झुलावै। हलरावै दुलरावै मल्हावै जोइ सोइ कछु गावै॥ मेरे लाल को आउ निंदरिया काहें न आनि सुवावै। तू काहै नहिं बेगहिं आवै तोकौं कान्ह बुलावै॥ कबहुं पलक हरि मूंदि लेत हैं कबहुं...
ऊधौ, कर्मन की गति न्यारी।सब नदियाँ जल भरि-भरि रहियाँ सागर केहि बिध खारी॥उज्ज्वल पंख दिये बगुला को कोयल केहि गुन कारी॥सुन्दर नयन मृगा को दीन्हे बन-बन फिरत उजारी॥मूरख-मूरख राजे कीन्हे पंडित फिरत भिखारी॥सूर श्याम मिलने...
मधुकर! स्याम हमारे चोर।मन हरि लियो सांवरी सूरत¸ चितै नयन की कोर।।पकरयो तेहि हिरदय उर–अंतर प्रेम–प्रीत के जोर।गए छुड़ाय छोरि सब बंधन दे गए हंसनि अंकोर।।सोबत तें हम उचकी परी हैं दूत मिल्यो मोहिं भोर।सूर¸...
तिहारो दरस मोहे भावे श्री यमुना जी ।श्री गोकुल के निकट बहत हो, लहरन की छवि आवे ॥१॥सुख देनी दुख हरणी श्री यमुना जी, जो जन प्रात उठ न्हावे ।मदन मोहन जू की खरी प्यारी,...