तेरो कोई नहिं रोकणहार

तेरो कोई नहिं रोकणहार, मगन होइ मीरा चली।।
लाज सरम कुल की मरजादा, सिरसै दूर करी।
मान-अपमान दोऊ धर पटके, निकसी ग्यान गली।।
ऊँची अटरिया लाल किंवड़िया, निरगुण-सेज बिछी।
पंचरंगी झालर सुभ सोहै, फूलन फूल कली।
बाजूबंद कडूला सोहै, सिंदूर मांग भरी।
सुमिरण थाल हाथ में लीन्हों, सौभा अधिक खरी।।
सेज सुखमणा मीरा सौहै, सुभ है आज घरी।
तुम जाओ राणा घर अपणे, मेरी थांरी नांहि सरी।।

Author: Unknown Claim credit

Comments

संबंधित लेख

आगामी उपवास और त्यौहार

करवा चौथ

गुरूवार, 29 अक्टूबर 2026

करवा चौथ
धनतेरस

शुक्रवार, 06 नवम्बर 2026

धनतेरस
दीपावली

रविवार, 08 नवम्बर 2026

दीपावली
गोवर्धन पूजा

मंगलवार, 10 नवम्बर 2026

गोवर्धन पूजा

संग्रह