चलो चलो अब अवधपुरी को

( तर्ज :- सारी दुनिया तुमको पूजे राधा जी के नाथ जी )

चलो चलो अब अवधपुरी को,
अवधपुरी के नाथ जी,
सारी अयोध्या तुम बिन सूनी,
चल दो मेरे साथ जी ।

नहीं चले तो राज अवध का,
तुम बिन कौन संभालेगा,
राजा यहाँ ओर प्रजा वहां है,
कौन प्रजा को पालेगा ।
सूख रहे हैं आंख के आंसू,
कर दो अब बरसात जी।।
सारी अयोध्या तुम……..

मां की इच्छा, पिता वचन मैं,
पूरा करने आया हूं
वन में ही अब मेरा घर ,
मैं यहीं पे रहने आया हूं ।
राज मुझे तुम फिर दे देना,
चौदह बरस के बाद जी,
जाओ भरत तुम अवधपुरी को,
तुम्ही संभालो राज जी ।-3
सारी अयोध्या तुम……..

चरण पादुका दे दो अपनी,
उनको ही ले जाऊंगा ,
एक दिन की भी देरी की तो ,
अपनी चिता जलाऊंगा,
चौदह बरस तो मैं भी रहूंगा ,
लेकर अब सन्यास जी
सारी अयोध्या तुम…….. ।

चलो चलो अब अवधपुरी को अवधपुरी के नाथ जी,
सारी अयोध्या तुम बिन सूनी चल दो मेरे साथ जी।।

Author: प्रदीप गौर

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