ऐसा है मेरे श्री हरि का नाम ,
कैसे उनका करूँ गुणगान, बाकी कोई न करुणानिधान .
ऐसा है मेरे…..

निष्छल भक्ति तेरी हरदम होती है ,
लेते हैं जब परीक्षा तब तब रोती है ,
ग्राह गज की कथा में कहा है ,
गज की प्रभु ने बचाई है जान ,
ऐसा है मेरे …….

तेरी ही इक कृपा से प्रह्लाद बनते हैं ,
ध्रव सा महा तपस्वी तेरा नाम जपते हैं ,
जिनको विपदा से तुमने उबारा ,
दे दिया उनको अपना ही धाम ,
ऐसा है मेरे………

एक बार में भी उपकार करते हैं ,
निर्धन विप्र सुदामा के भंडार भरते हैं ,
द्रोपदी की बचाई थी लाज ,
उनको ही है मेरा प्रणाम ,
ऐसा है मेरे……

जूठे बेर खाकर संदेश देते हैं ,
केवट का भी कहना कैसे मान लेते हैं ,
शिल की तारी थी तुमने अहिल्या ,
सबके पूरे हुए अरमान ,
ऐसा है मेरे श्री हरि का नाम .

Author: Unknown Claim credit

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