थारो जनम बरबाद मत कीजो रे, कु संग मे

कु संगत मे कु मति आवे,कु मति तुमको कु कर्म करावे
निरख निर्माण मत कीजो रे

जैसा ही तु संग करेगा,वैसा ही तेरे रंग चढेगा
मूरख संग मत कीजो रे

अवगुण पाप नित बढता जावे,पुण्य कर्म नित घटता जावे
विषया रो रस मत पीजे रे

सदानंद थाने समझावे,मानुष तन फिर हाथ ना आवे
सत को मारग लीजो रे

Comments

संबंधित लेख

आगामी उपवास और त्यौहार

संकष्टी चतुर्थी

मंगलवार, 25 जून 2024

संकष्टी चतुर्थी
योगिनी एकादशी

मंगलवार, 02 जुलाई 2024

योगिनी एकादशी
मासिक शिवरात्रि

गुरूवार, 04 जुलाई 2024

मासिक शिवरात्रि
जगन्नाथ रथ यात्रा

रविवार, 07 जुलाई 2024

जगन्नाथ रथ यात्रा
गौरी व्रत

गुरूवार, 11 जुलाई 2024

गौरी व्रत
देवशयनी एकादशी

बुधवार, 17 जुलाई 2024

देवशयनी एकादशी

संग्रह