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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

चामुंडा माता मंदिर, चोटिला

Chamunda Mata Temple, Chotila

Surendranagar, गुजरात माँ चामुंडा (महाकाली का स्वरूप) निःशुल्क प्रवेश

चामुंडा माता मंदिर गुजरात के सुरेन्द्रनगर जिले के चोटिला नगर में चोटिला डुंगर (चामुंड पर्वत) की चोटी पर स्थित माँ चामुंडा का प्रसिद्ध मंदिर है। अहमदाबाद–राजकोट राजमार्ग से दूर तक दिखने वाली यह पहाड़ी लगभग 1,170–1,250 फीट ऊँची बताई जाती है और मंदिर तक पहुँचने के लिए 600 से अधिक सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। माँ चामुंडा गुजरात, विशेषकर सौराष्ट्र के अनेक परिवारों की कुलदेवी हैं, इसलिए यहाँ वर्ष भर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है।

चंड-मुंड वध की कथा

देवी माहात्म्य की कथा के अनुसार शुंभ-निशुंभ के सेनापति चंड और मुंड ने देवी पर आक्रमण किया। तब देवी के क्रोध से प्रकट महाकाली ने युद्ध में दोनों असुरों का वध किया और उनके शीश माँ अंबिका को अर्पित किए। प्रसन्न होकर अंबिका ने कहा कि अब वे चामुंडा नाम से पूजी जाएँगी। चोटिला में देवी के इसी स्वरूप की उपासना होती है।

चोटिला का इतिहास

प्राचीन काल में चोटिला चोटगढ़ नाम से जाना जाता था और पहले सोढा परमारों के अधिकार में था। सन 1566 में काठी शासकों ने इसे अपने अधिकार में लिया और यह उनकी प्रमुख गद्दियों में से एक बना। प्रसिद्ध गुजराती साहित्यकार झवेरचंद मेघाणी का जन्म भी चोटिला में हुआ था। मंदिर की स्थापना की तिथि ज्ञात नहीं है, पर इसे प्राचीन शक्ति स्थल माना जाता है।

चढ़ाई और दर्शन

पहाड़ी की तलहटी से पत्थर की सीढ़ियाँ सीधे मंदिर तक जाती हैं; रास्ते में विश्राम के लिए छाया और पेयजल की व्यवस्था है। यहाँ रोपवे नहीं है, इसलिए चढ़ाई पैदल ही होती है। जो भक्त ऊपर नहीं चढ़ सकते, वे तलहटी पर बने स्थान से माँ को प्रणाम करते हैं। चोटी से आसपास के मैदानों का विस्तृत दृश्य दिखाई देता है।

प्रमुख उत्सव

  • शारदीय नवरात्रि: नौ दिन का महोत्सव – प्रतिदिन माताजी का नया श्रृंगार, महाआरती और नीचे से चोटी तक रोशनी से जगमगाती सीढ़ियाँ।
  • चैत्र नवरात्रि में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 5:00 से शाम सूर्यास्त के बाद तक (लगभग 7:00–7:30 बजे)
  • आरती: प्रातः और संध्या

नवरात्रि और पर्वों पर समय बदल सकता है। गर्मी में सुबह जल्दी चढ़ाई करना सुविधाजनक रहता है।

मुख्य आकर्षण

  • माँ चामुंडा – चोटिला डुंगर की चोटी पर विराजमान।
  • सीढ़ियों की चढ़ाई – लगभग 600 से अधिक पत्थर की सीढ़ियाँ।
  • चोटी से दृश्य – आसपास के मैदानों और चोटिला नगर का विस्तृत दृश्य।
  • नवरात्रि महोत्सव – रोज़ नया श्रृंगार और रोशनी से जगमगाती सीढ़ियाँ।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: चोटिला अहमदाबाद–राजकोट राजमार्ग पर है; राजकोट से लगभग 50–65 किमी। गुजरात के कई शहरों से बसें।
  • रेल मार्ग: थान जंक्शन (लगभग 21 किमी); बड़ा स्टेशन राजकोट जंक्शन।
  • हवाई मार्ग: राजकोट हवाई अड्डा (लगभग 48 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

चोटिला मंदिर तक कितनी सीढ़ियाँ हैं?
चोटिला डुंगर की चोटी पर स्थित मंदिर तक लगभग 600 से अधिक सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं (अलग-अलग स्रोत 620 से 700 तक बताते हैं)।
चोटिला की माँ चामुंडा की कथा क्या है?
देवी माहात्म्य की कथा के अनुसार चंड और मुंड नामक असुरों का वध करके देवी ने उनके शीश माँ अंबिका को अर्पित किए, तब से वे चामुंडा कहलाईं। चोटिला में इसी स्वरूप की पूजा होती है।
चोटिला पर्वत कितना ऊँचा है?
चोटिला डुंगर की ऊँचाई लगभग 1,170 से 1,250 फीट बताई जाती है। इसकी चोटी पर माँ चामुंडा का मंदिर है।
चामुंडा माता किसकी कुलदेवी हैं?
चोटिला की माँ चामुंडा गुजरात, विशेषकर सौराष्ट्र के अनेक हिंदू परिवारों और समुदायों की कुलदेवी हैं। वर्ष भर देश भर से हज़ारों श्रद्धालु यहाँ आते हैं।
चोटिला राजकोट से कितनी दूर है?
चोटिला अहमदाबाद–राजकोट राजमार्ग पर राजकोट से लगभग 50–65 किमी दूर है। राजकोट हवाई अड्डा लगभग 48 किमी और थान रेलवे स्टेशन लगभग 21 किमी है।

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