श्री महालक्ष्मी मंदिर, जिसे स्थानीय लोग प्रेम से अंबाबाई मंदिर कहते हैं, महाराष्ट्र के कोल्हापुर नगर के बीचोंबीच स्थित माँ महालक्ष्मी का प्राचीन मंदिर है। आदि शंकराचार्य से जुड़े अष्टादश महाशक्तिपीठ स्तोत्र में यह सातवाँ पीठ है – “कोल्हापुरे महालक्ष्मी” – और इसे श्री पीठ भी कहा जाता है। यह मंदिर महाराष्ट्र के साढ़े तीन शक्तिपीठों में भी गिना जाता है (तुलजापुर, माहुर और वणी की सप्तश्रृंगी के साथ)। 51 शक्तिपीठों की कुछ सूचियों में भी करवीर (कोल्हापुर) का नाम आता है, जहाँ सती के नेत्र गिरने की मान्यता है।
करवीर क्षेत्र और कोल्हासुर की कथा
पुराणों में कोल्हापुर क्षेत्र को करवीर कहा गया है, और यह नाम आज भी स्थानीय रूप से प्रयोग होता है। कथा के अनुसार यहाँ कोल्हासुर नामक असुर का आतंक था, जिसका वध करने के लिए माँ महालक्ष्मी प्रकट हुईं। असुर के नाम से ही नगर का नाम कोल्हापुर पड़ा माना जाता है। मान्यता है कि महालक्ष्मी भगवान विष्णु (वेंकटेश्वर) की शक्ति हैं, इसलिए बहुत से श्रद्धालु तिरुपति यात्रा के साथ अंबाबाई के दर्शन भी करते हैं।
मंदिर और विग्रह
परंपरा के अनुसार मंदिर का निर्माण 7वीं शताब्दी में चालुक्य काल में हुआ, और बाद के शासकों ने इसका विस्तार किया। गर्भगृह में लगभग तीन फ़ुट ऊँची, मुकुटधारी देवी की प्रतिमा है, जिसके मुकुट में पंचमुखी नाग अंकित है। देवी के चार हाथों में मातुलिंग फल, गदा, ढाल और पानपात्र हैं, और पीछे उनका वाहन सिंह है। मंदिर की एक दीवार पर श्री यंत्र उकेरा गया है। देवी की प्रतिमा पश्चिमाभिमुख मानी जाती है।
किरणोत्सव
मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा किरणोत्सव है। वर्ष में दो बार – सामान्यतः जनवरी के अंत-फ़रवरी के आरंभ में और नवंबर में – कुछ दिनों तक अस्त होते सूर्य की किरणें महाद्वार से होकर सीधे देवी तक पहुँचती हैं। पहले दिन किरणें चरणों को, दूसरे दिन मध्य भाग को और तीसरे दिन पूरी प्रतिमा को स्पर्श करती हैं। इन दिनों हज़ारों भक्त यह दृश्य देखने आते हैं; तिथियाँ हर वर्ष थोड़ी बदल सकती हैं।
प्रमुख उत्सव
- शारदीय नवरात्रि: सबसे बड़ा उत्सव – प्रतिदिन देवी का विशेष श्रृंगार और भारी भीड़।
- ललिता पंचमी और रथोत्सव।
- मार्गशीर्ष गुरुवार, दीपावली लक्ष्मी पूजन और किरणोत्सव।
दर्शन का समय
- दर्शन: सुबह लगभग 4:30 से रात लगभग 10:00 बजे तक
- काकड़ आरती: भोर में लगभग 4:30–5:00 बजे
- शेज आरती: रात लगभग 10:00 बजे
नवरात्रि, ग्रहण और विशेष पर्वों पर समय बदल सकता है।
मुख्य आकर्षण
- माँ अंबाबाई – मुकुट में पंचमुखी नाग, हाथों में मातुलिंग फल, गदा, ढाल और पानपात्र।
- सिंह – देवी का वाहन, प्रतिमा के पीछे।
- श्री यंत्र – मंदिर की दीवार पर उकेरा हुआ।
- किरणोत्सव – वर्ष में दो बार सूर्य किरणें देवी तक पहुँचती हैं।
कैसे पहुँचें
- रेल मार्ग: छत्रपति शाहू महाराज टर्मिनस, कोल्हापुर (लगभग 3 किमी)।
- सड़क मार्ग: पुणे–बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग से; पुणे से लगभग 230 किमी, शहर में ऑटो और बसें।
- हवाई मार्ग: कोल्हापुर हवाई अड्डा (उजळाईवाडी), लगभग 10 किमी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कोल्हापुर महालक्ष्मी मंदिर किस शक्तिपीठ से जुड़ा है?
देवी को अंबाबाई क्यों कहते हैं?
किरणोत्सव क्या है?
कोल्हापुर को करवीर क्यों कहते हैं?
क्या कोल्हापुर और तिरुपति यात्रा का संबंध है?
श्री महालक्ष्मी (अंबाबाई) मंदिर, कोल्हापुर इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
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नासिक, महाराष्ट्र भद्रकाली मंदिर (जनस्थान शक्तिपीठ), नासिक माँ भद्रकाली; शक्तिपीठ – भ्रामरी, भैरव विकृताक्ष
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रायगढ़, महाराष्ट्र बल्लालेश्वर गणपति मंदिर, पाली श्री बल्लालेश्वर गणपति; ढुंढी विनायक
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पुणे, महाराष्ट्र चिंतामणि गणपति मंदिर (अष्टविनायक), थेऊर श्री चिंतामणि गणपति (स्वयंभू विग्रह)
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पुणे, महाराष्ट्र गिरिजात्मज गणपति मंदिर (अष्टविनायक), लेण्याद्री श्री गिरिजात्मज गणपति (गुफा की शिला में स्वयंभू विग्रह)
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पुणे, महाराष्ट्र महागणपति मंदिर (अष्टविनायक), रांजणगाँव श्री महागणपति, ऋद्धि-सिद्धि सहित
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पुणे, महाराष्ट्र मयूरेश्वर (मोरेश्वर) गणपति मंदिर, मोरगाँव श्री मयूरेश्वर (मोरेश्वर) गणपति, सिद्धि-बुद्धि सहित