मुख्य सामग्री पर जाएँ

कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas

चिंतामणि गणपति मंदिर (अष्टविनायक), थेऊर

Chintamani Ganapati Temple (Ashtavinayak), Theur

पुणे, महाराष्ट्र श्री चिंतामणि गणपति (स्वयंभू विग्रह) निःशुल्क प्रवेश

चिंतामणि गणपति मंदिर महाराष्ट्र के पुणे जिले के थेऊर गाँव में स्थित गणेश जी का प्राचीन मंदिर है। यह अष्टविनायक – महाराष्ट्र के आठ स्वयंभू गणपति स्थानों – में से एक है और पारंपरिक यात्रा क्रम में पाँचवाँ स्थान रखता है। मुला-मुठा और भीमा नदियों के संगम के पास बसा थेऊर पुणे से लगभग 25 किमी दूर है, इसलिए यह अष्टविनायकों में सबसे अधिक दर्शन किए जाने वाले मंदिरों में गिना जाता है।

चिंतामणि रत्न की कथा

गणेश पुराण से जुड़ी कथा के अनुसार लोभी राजा गण (गणासुर) ने कपिल मुनि से इच्छापूर्ति करने वाला चिंतामणि रत्न छीन लिया था। मुनि की प्रार्थना पर गणेश जी ने गणासुर का संहार किया और रत्न लौटाया। किंतु कपिल मुनि ने रत्न के स्थान पर स्वयं गणेश जी को ही अपने पास रहने का वर माँगा। तभी से गणपति यहाँ चिंतामणि – चिंताओं को हरने वाले – नाम से विराजते हैं। एक अन्य मान्यता के अनुसार यहीं गणेश जी ने ब्रह्मा जी के अशांत मन को शांत किया था।

मंदिर और विग्रह

पूर्वाभिमुख गर्भगृह में विराजमान चिंतामणि का विग्रह स्वयंभू माना जाता है। सिंदूर से लेपित इस मूर्ति की सूंड बाईं ओर मुड़ी है और नेत्रों में रत्न जड़े हैं। मंदिर के निर्माण का श्रेय गाणपत्य संत मोरया गोसावी या उनके वंशज धरणीधर देव को दिया जाता है। बाद में पेशवा माधवराव प्रथम ने इसका जीर्णोद्धार कराया और लकड़ी का सुंदर सभामंडप बनवाया। चिमाजी अप्पा ने वसई किले की विजय के बाद पुर्तगालियों से प्राप्त एक बड़ा यूरोपीय घंटा यहाँ अर्पित किया। आज मंदिर चिंचवड देवस्थान ट्रस्ट के अधीन है।

माधवराव पेशवा और थेऊर

पेशवा माधवराव प्रथम चिंतामणि के अनन्य भक्त थे। गंभीर बीमारी के दिनों में वे थेऊर आ गए और अंतिम समय यहीं मंदिर के परिसर में बिताया। यहीं उनका देहांत हुआ और उनकी पत्नी रमाबाई भी उनके साथ सती हुईं। उनकी स्मृति में आज भी कार्तिक मास में रमा-माधव पुण्योत्सव मनाया जाता है।

प्रमुख उत्सव

  • गणेश प्रकटोत्सव: भाद्रपद शुक्ल प्रतिपदा से सप्तमी तक, गणेश चतुर्थी सहित।
  • माघोत्सव (गणेश जयंती): माघ शुक्ल पक्ष में।
  • रमा-माधव पुण्योत्सव: कार्तिक मास की अष्टमी को।
  • हर संकष्टी और अंगारकी चतुर्थी पर विशेष भीड़।

अष्टविनायक यात्रा क्रम

पारंपरिक क्रम है – मोरगाँव (मयूरेश्वर), सिद्धटेक (सिद्धिविनायक), पाली (बल्लालेश्वर), महड (वरदविनायक), थेऊर (चिंतामणि), लेण्याद्री (गिरिजात्मज), ओझर (विघ्नेश्वर), रांजणगाँव (महागणपति) और अंत में फिर मोरगाँव। पुणे से निकट होने के कारण कई यात्री मोरगाँव के बाद सीधे थेऊर आ जाते हैं।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से दोपहर 1:00 बजे और दोपहर 2:00 से रात 10:00 बजे तक
  • आरती: सुबह, मध्याह्न और रात्रि

गणेश चतुर्थी, माघी गणेश जयंती और अंगारकी चतुर्थी पर भारी भीड़ रहती है।

मुख्य आकर्षण

  • श्री चिंतामणि – बाईं ओर मुड़ी सूंड और रत्नजड़ित नेत्रों वाला स्वयंभू विग्रह।
  • माधवराव पेशवा का बनवाया लकड़ी का सभामंडप।
  • चिमाजी अप्पा द्वारा अर्पित वसई किले से लाया गया बड़ा घंटा।
  • मुला-मुठा और भीमा नदियों का संगम क्षेत्र।
  • अष्टविनायक के अन्य स्थान – मोरगाँव, रांजणगाँव, सिद्धटेक।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: पुणे से लगभग 25 किमी (पुणे–सोलापुर मार्ग से लोणी काळभोर होकर); पुणे से बस और टैक्सी उपलब्ध।
  • रेल मार्ग: पुणे जंक्शन (लगभग 25 किमी)।
  • हवाई मार्ग: पुणे हवाई अड्डा (लगभग 25 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अष्टविनायक में थेऊर का क्रम क्या है?
पारंपरिक अष्टविनायक यात्रा में थेऊर का चिंतामणि पाँचवाँ स्थान है। मार्ग की सुविधा के कारण कई श्रद्धालु मोरगाँव के बाद दूसरे क्रम में ही थेऊर के दर्शन कर लेते हैं।
गणपति का नाम चिंतामणि क्यों पड़ा?
कथा के अनुसार राजा गण (गणासुर) ने कपिल मुनि से इच्छापूर्ति करने वाला चिंतामणि रत्न छीन लिया था। गणेश जी ने उसे परास्त कर रत्न लौटाया, पर कपिल मुनि ने रत्न के स्थान पर गणेश जी को ही अपने पास रखना चाहा। तब से वे यहाँ चिंतामणि नाम से विराजते हैं।
माधवराव पेशवा का थेऊर से क्या संबंध है?
पेशवा माधवराव प्रथम चिंतामणि के बड़े भक्त थे। उन्होंने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया और लकड़ी का सभामंडप बनवाया। उन्होंने अपने अंतिम दिन थेऊर में बिताए और यहीं उनका देहांत हुआ।
थेऊर मंदिर का प्रबंधन कौन करता है?
थेऊर का चिंतामणि मंदिर चिंचवड देवस्थान ट्रस्ट के अधीन है, जो मोरगाँव और सिद्धटेक के अष्टविनायक मंदिरों की भी देखरेख करता है।
पुणे से थेऊर कितनी दूर है?
थेऊर पुणे से लगभग 25 किमी दूर हवेली तालुका में है। सड़क मार्ग से लगभग एक घंटा लगता है।

चिंतामणि गणपति मंदिर (अष्टविनायक), थेऊर इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

दर्शन की जानकारी साझा करें

WhatsApp Facebook