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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas

महागणपति मंदिर (अष्टविनायक), रांजणगाँव

Mahaganapati Temple (Ashtavinayak), Ranjangaon

पुणे, महाराष्ट्र श्री महागणपति, ऋद्धि-सिद्धि सहित निःशुल्क प्रवेश

महागणपति मंदिर महाराष्ट्र के पुणे जिले की शिरूर तालुका के रांजणगाँव में स्थित गणेश जी का प्रसिद्ध मंदिर है। यह अष्टविनायक यात्रा का आठवाँ और अंतिम स्थान है; इसके बाद यात्री मोरगाँव लौटकर यात्रा पूर्ण करते हैं। पुणे–अहमदनगर राजमार्ग पर, पुणे से लगभग 50 किमी दूर स्थित यह मंदिर अष्टविनायकों में सबसे शक्तिशाली रूप – महागणपति – का स्थान माना जाता है।

त्रिपुरासुर और शिव की कथा

कथा के अनुसार गणेश जी के वरदान से शक्तिशाली हुआ त्रिपुरासुर तीनों लोकों को त्रस्त करने लगा। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान शिव उससे युद्ध करने निकले, पर पहले प्रयास में सफल नहीं हुए। तब उन्होंने यहाँ गणेश जी की उपासना की और उनके आशीर्वाद से एक ही बाण में त्रिपुरासुर के तीनों नगरों का संहार किया। मान्यता है कि शिव ने यहाँ जो नगर बसाया, वह मणिपुर कहलाया – आज का रांजणगाँव।

मंदिर और विग्रह

मंदिर पूर्वाभिमुख है और इसका विशाल प्रवेश द्वार ऊपर बने नगारखाने से सुशोभित है। गर्भगृह में महागणपति कमलासन पर पालथी मारकर विराजे हैं – चौड़ा ललाट, बाईं ओर मुड़ी सूंड और दोनों ओर ऋद्धि-सिद्धि। पेशवा माधवराव प्रथम ने पत्थर का गर्भगृह बनवाया और बाद में इंदौर के सरदार किबे ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। मान्यता है कि गर्भगृह इस प्रकार बना है कि वर्ष के कुछ दिनों में सूर्योदय की किरणें सीधे विग्रह तक पहुँचती हैं।

महोत्कट विग्रह की लोकमान्यता

एक प्रचलित लोकमान्यता है कि मूल विग्रह, जिसे महोत्कट कहा जाता है और जिसकी दस सूंड और बीस भुजाएँ बताई जाती हैं, मंदिर के तहखाने में सुरक्षित रखा गया है। मंदिर प्रशासन इस बात को स्वीकार नहीं करता, इसलिए इसे केवल परंपरा से चली आ रही मान्यता के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

प्रमुख उत्सव

  • भाद्रपद गणेशोत्सव: गणेश चतुर्थी पर सबसे बड़ा उत्सव और भारी भीड़।
  • माघी गणेश जयंती पर विशेष पूजा।
  • हर संकष्टी और अंगारकी चतुर्थी पर दर्शन के लिए लंबी कतारें।

अष्टविनायक यात्रा का समापन

पारंपरिक क्रम में रांजणगाँव ओझर (विघ्नेश्वर) के बाद आता है। महागणपति के दर्शन के बाद यात्री फिर मोरगाँव के मयूरेश्वर के दर्शन करके अष्टविनायक यात्रा का संकल्प पूरा करते हैं। पुणे से निकट होने के कारण कई श्रद्धालु थेऊर के साथ एक ही दिन में रांजणगाँव के दर्शन भी कर लेते हैं।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 5:00 से रात लगभग 10:00 बजे तक
  • आरती: सुबह, मध्याह्न महापूजा और संध्या

भाद्रपद गणेशोत्सव, माघी गणेश जयंती और अंगारकी चतुर्थी पर विशेष भीड़ रहती है।

मुख्य आकर्षण

  • श्री महागणपति – कमलासन पर विराजे, बाईं सूंड और चौड़े ललाट वाला पूर्वाभिमुख विग्रह।
  • ऊपर नगारखाने वाला भव्य प्रवेश द्वार।
  • पूर्वाभिमुख गर्भगृह, जिसमें विशेष दिनों पर सूर्य किरणें विग्रह तक पहुँचती हैं (मान्यता)।
  • पुणे–अहमदनगर मार्ग पर सुगम स्थान।
  • अष्टविनायक के अन्य स्थान – थेऊर, मोरगाँव, सिद्धटेक।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: पुणे से लगभग 50 किमी, पुणे–अहमदनगर राजमार्ग पर शिक्रापुर होकर; शिरूर से लगभग 21 किमी पहले। पुणे से बसें उपलब्ध।
  • रेल मार्ग: पुणे जंक्शन (लगभग 50 किमी)।
  • हवाई मार्ग: पुणे हवाई अड्डा (लगभग 50 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अष्टविनायक में रांजणगाँव का क्रम क्या है?
पारंपरिक अष्टविनायक यात्रा में रांजणगाँव का महागणपति आठवाँ और अंतिम स्थान है। इसके बाद यात्री मोरगाँव लौटकर मयूरेश्वर के दर्शन से यात्रा पूर्ण करते हैं।
रांजणगाँव के महागणपति की कथा क्या है?
मान्यता है कि भगवान शिव ने त्रिपुरासुर से युद्ध करने से पहले यहाँ गणेश जी की पूजा की थी और उनके आशीर्वाद से त्रिपुरासुर का वध किया। शिव द्वारा बसाया गया नगर मणिपुर कहलाया, जो आज रांजणगाँव है।
क्या रांजणगाँव में असली मूर्ति तहखाने में छिपी है?
एक लोकमान्यता है कि मूल विग्रह, जिसे महोत्कट कहा जाता है और जिसकी दस सूंड और बीस भुजाएँ बताई जाती हैं, तहखाने में छिपा है। मंदिर प्रशासन इस बात को स्वीकार नहीं करता।
रांजणगाँव मंदिर किसने बनवाया?
मंदिर प्राचीन माना जाता है। पेशवा माधवराव प्रथम ने पत्थर का गर्भगृह बनवाया और बाद में इंदौर के सरदार किबे ने इसका जीर्णोद्धार कराया।
पुणे से रांजणगाँव कितनी दूर है?
रांजणगाँव पुणे से लगभग 50 किमी दूर पुणे–अहमदनगर राजमार्ग पर है। सड़क मार्ग से लगभग डेढ़ घंटा लगता है।

महागणपति मंदिर (अष्टविनायक), रांजणगाँव इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

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