महागणपति मंदिर महाराष्ट्र के पुणे जिले की शिरूर तालुका के रांजणगाँव में स्थित गणेश जी का प्रसिद्ध मंदिर है। यह अष्टविनायक यात्रा का आठवाँ और अंतिम स्थान है; इसके बाद यात्री मोरगाँव लौटकर यात्रा पूर्ण करते हैं। पुणे–अहमदनगर राजमार्ग पर, पुणे से लगभग 50 किमी दूर स्थित यह मंदिर अष्टविनायकों में सबसे शक्तिशाली रूप – महागणपति – का स्थान माना जाता है।
त्रिपुरासुर और शिव की कथा
कथा के अनुसार गणेश जी के वरदान से शक्तिशाली हुआ त्रिपुरासुर तीनों लोकों को त्रस्त करने लगा। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान शिव उससे युद्ध करने निकले, पर पहले प्रयास में सफल नहीं हुए। तब उन्होंने यहाँ गणेश जी की उपासना की और उनके आशीर्वाद से एक ही बाण में त्रिपुरासुर के तीनों नगरों का संहार किया। मान्यता है कि शिव ने यहाँ जो नगर बसाया, वह मणिपुर कहलाया – आज का रांजणगाँव।
मंदिर और विग्रह
मंदिर पूर्वाभिमुख है और इसका विशाल प्रवेश द्वार ऊपर बने नगारखाने से सुशोभित है। गर्भगृह में महागणपति कमलासन पर पालथी मारकर विराजे हैं – चौड़ा ललाट, बाईं ओर मुड़ी सूंड और दोनों ओर ऋद्धि-सिद्धि। पेशवा माधवराव प्रथम ने पत्थर का गर्भगृह बनवाया और बाद में इंदौर के सरदार किबे ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। मान्यता है कि गर्भगृह इस प्रकार बना है कि वर्ष के कुछ दिनों में सूर्योदय की किरणें सीधे विग्रह तक पहुँचती हैं।
महोत्कट विग्रह की लोकमान्यता
एक प्रचलित लोकमान्यता है कि मूल विग्रह, जिसे महोत्कट कहा जाता है और जिसकी दस सूंड और बीस भुजाएँ बताई जाती हैं, मंदिर के तहखाने में सुरक्षित रखा गया है। मंदिर प्रशासन इस बात को स्वीकार नहीं करता, इसलिए इसे केवल परंपरा से चली आ रही मान्यता के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
प्रमुख उत्सव
- भाद्रपद गणेशोत्सव: गणेश चतुर्थी पर सबसे बड़ा उत्सव और भारी भीड़।
- माघी गणेश जयंती पर विशेष पूजा।
- हर संकष्टी और अंगारकी चतुर्थी पर दर्शन के लिए लंबी कतारें।
अष्टविनायक यात्रा का समापन
पारंपरिक क्रम में रांजणगाँव ओझर (विघ्नेश्वर) के बाद आता है। महागणपति के दर्शन के बाद यात्री फिर मोरगाँव के मयूरेश्वर के दर्शन करके अष्टविनायक यात्रा का संकल्प पूरा करते हैं। पुणे से निकट होने के कारण कई श्रद्धालु थेऊर के साथ एक ही दिन में रांजणगाँव के दर्शन भी कर लेते हैं।
दर्शन का समय
- दर्शन: सुबह लगभग 5:00 से रात लगभग 10:00 बजे तक
- आरती: सुबह, मध्याह्न महापूजा और संध्या
भाद्रपद गणेशोत्सव, माघी गणेश जयंती और अंगारकी चतुर्थी पर विशेष भीड़ रहती है।
मुख्य आकर्षण
- श्री महागणपति – कमलासन पर विराजे, बाईं सूंड और चौड़े ललाट वाला पूर्वाभिमुख विग्रह।
- ऊपर नगारखाने वाला भव्य प्रवेश द्वार।
- पूर्वाभिमुख गर्भगृह, जिसमें विशेष दिनों पर सूर्य किरणें विग्रह तक पहुँचती हैं (मान्यता)।
- पुणे–अहमदनगर मार्ग पर सुगम स्थान।
- अष्टविनायक के अन्य स्थान – थेऊर, मोरगाँव, सिद्धटेक।
कैसे पहुँचें
- सड़क मार्ग: पुणे से लगभग 50 किमी, पुणे–अहमदनगर राजमार्ग पर शिक्रापुर होकर; शिरूर से लगभग 21 किमी पहले। पुणे से बसें उपलब्ध।
- रेल मार्ग: पुणे जंक्शन (लगभग 50 किमी)।
- हवाई मार्ग: पुणे हवाई अड्डा (लगभग 50 किमी)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अष्टविनायक में रांजणगाँव का क्रम क्या है?
रांजणगाँव के महागणपति की कथा क्या है?
क्या रांजणगाँव में असली मूर्ति तहखाने में छिपी है?
रांजणगाँव मंदिर किसने बनवाया?
पुणे से रांजणगाँव कितनी दूर है?
महागणपति मंदिर (अष्टविनायक), रांजणगाँव इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
-
नासिक, महाराष्ट्र भद्रकाली मंदिर (जनस्थान शक्तिपीठ), नासिक माँ भद्रकाली; शक्तिपीठ – भ्रामरी, भैरव विकृताक्ष
-
रायगढ़, महाराष्ट्र बल्लालेश्वर गणपति मंदिर, पाली श्री बल्लालेश्वर गणपति; ढुंढी विनायक
-
पुणे, महाराष्ट्र चिंतामणि गणपति मंदिर (अष्टविनायक), थेऊर श्री चिंतामणि गणपति (स्वयंभू विग्रह)
-
पुणे, महाराष्ट्र गिरिजात्मज गणपति मंदिर (अष्टविनायक), लेण्याद्री श्री गिरिजात्मज गणपति (गुफा की शिला में स्वयंभू विग्रह)
-
Kolhapur, महाराष्ट्र श्री महालक्ष्मी (अंबाबाई) मंदिर, कोल्हापुर माँ महालक्ष्मी (अंबाबाई)
-
पुणे, महाराष्ट्र मयूरेश्वर (मोरेश्वर) गणपति मंदिर, मोरगाँव श्री मयूरेश्वर (मोरेश्वर) गणपति, सिद्धि-बुद्धि सहित