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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas

रेणुका देवी मंदिर (एकवीरिका शक्तिपीठ), माहुर

Renuka Devi Temple (Ekaveerika Shakti Peeth), Mahur

Nanded Waghala, महाराष्ट्र माँ रेणुका देवी (एकवीरा / एकवीरिका) निःशुल्क प्रवेश

रेणुका देवी मंदिर महाराष्ट्र के नांदेड़ ज़िले में माहुर (माहुरगढ़) की पहाड़ी पर स्थित भगवान परशुराम की माता रेणुका देवी का प्राचीन मंदिर है। आदि शंकराचार्य से जुड़े अष्टादश महाशक्तिपीठ स्तोत्र में आठवाँ पीठ “माहुर्यां एकवीरिका” कहा गया है, और परंपरा इस एकवीरिका (एकवीरा) देवी को माहुर की रेणुका माता से जोड़ती है। यह मंदिर महाराष्ट्र के साढ़े तीन शक्तिपीठों में भी गिना जाता है – कोल्हापुर की अंबाबाई और तुलजापुर की भवानी के साथ पूर्ण पीठ के रूप में, जबकि वणी की सप्तश्रृंगी को आधा पीठ माना जाता है।

रेणुका, जमदग्नि और परशुराम की कथा

रेणुका देवी ऋषि जमदग्नि की पत्नी और परशुराम की माता थीं। स्थानीय परंपरा के अनुसार राजा सहस्रार्जुन के अत्याचार के बाद जब रेणुका ने देह त्यागी, तो परशुराम ने भगवान दत्तात्रेय के मार्गदर्शन में माहुर में ही उनका अंतिम संस्कार किया। पहाड़ी पर स्थित मातृतीर्थ सरोवर को उसी स्थान से जोड़ा जाता है। एक अन्य लोककथा देवी के शीश के यहीं प्रतिष्ठित होने की बात कहती है।

मंदिर और विग्रह

गर्भगृह में माँ रेणुका का स्वयंभू स्वरूप है, जिसमें देवी का केवल मुख (शीश) दर्शनीय है और भक्त उस पर सिंदूर अर्पित करते हैं। मान्यता है कि वर्तमान मंदिर 13वीं शताब्दी के आसपास देवगिरि के यादवों के काल का है। पास ही परशुराम, ऋषि जमदग्नि और कालिका माता के मंदिर भी हैं। महाराष्ट्र के अनेक परिवार रेणुका माता को अपनी कुलदेवी मानते हैं।

तीन पहाड़ियाँ – रेणुका, दत्त और अनसूया

माहुर को भगवान दत्तात्रेय की जन्मभूमि माना जाता है, जहाँ उनके माता-पिता ऋषि अत्रि और अनसूया रहते थे। यहाँ तीन पहाड़ियाँ विशेष हैं – एक पर रेणुका माता का मंदिर, सबसे ऊँची पर दत्त शिखर (जहाँ पादुकाओं के स्थान पर दत्तात्रेय की पूर्ण प्रतिमा है) और तीसरी पर अत्रि-अनसूया मंदिर। पास ही गोंड काल का माहुरगढ़ किला और पांडव लेणी गुफाएँ भी हैं।

प्रमुख उत्सव

  • शारदीय नवरात्रि और विजयादशमी: सबसे बड़ा उत्सव, दशहरे पर विशाल मेला।
  • चैत्र नवरात्रि में भी विशेष पूजा।
  • दत्त जयंती और दत्त पूर्णिमा पर दत्त शिखर पर भारी भीड़।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से रात लगभग 10:00 बजे तक

नवरात्रि और दशहरा मेले के समय भीड़ बहुत अधिक रहती है; समय स्थानीय रूप से पुष्टि कर लें।

मुख्य आकर्षण

  • माँ रेणुका – स्वयंभू स्वरूप, जिसमें देवी का केवल मुख (शीश) दर्शनीय है।
  • मातृतीर्थ – पहाड़ी पर स्थित सरोवर।
  • दत्त शिखर – भगवान दत्तात्रेय का मंदिर, पादुका के स्थान पर पूर्ण प्रतिमा।
  • अत्रि-अनसूया मंदिर, परशुराम मंदिर और माहुरगढ़ किला।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: किनवट स्टेशन (लगभग 50 किमी); नांदेड़ स्टेशन अधिक सुविधाजनक।
  • सड़क मार्ग: नांदेड़ से लगभग 130–150 किमी; नांदेड़, यवतमाल और आसपास से बसें।
  • हवाई मार्ग: नांदेड़ हवाई अड्डा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

माहुर का रेणुका देवी मंदिर किस शक्तिपीठ से जुड़ा है?
आदि शंकराचार्य से जुड़े अष्टादश महाशक्तिपीठ स्तोत्र में आठवाँ पीठ "माहुर्यां एकवीरिका" है, जिसे माहुर की रेणुका देवी से जोड़ा जाता है। यह महाराष्ट्र के साढ़े तीन शक्तिपीठों में भी गिना जाता है।
रेणुका देवी कौन हैं?
रेणुका देवी ऋषि जमदग्नि की पत्नी और भगवान परशुराम की माता हैं। महाराष्ट्र और कर्नाटक में उन्हें एकवीरा, यल्लम्मा आदि नामों से भी पूजा जाता है।
माहुर में देवी का केवल मुख क्यों दिखता है?
यहाँ देवी का स्वयंभू स्वरूप है, जिसमें केवल शीश (मुख) दर्शनीय है। लोककथा के अनुसार परशुराम से जुड़ी घटना के बाद देवी का शीश यहीं प्रतिष्ठित हुआ, इसलिए उनके मुख की पूजा होती है।
माहुर का दत्तात्रेय से क्या संबंध है?
माहुर को भगवान दत्तात्रेय की जन्मभूमि माना जाता है, जहाँ उनके माता-पिता ऋषि अत्रि और अनसूया रहते थे। यहाँ की एक पहाड़ी पर दत्त शिखर और दूसरी पर अत्रि-अनसूया मंदिर है।
माहुर कैसे पहुँचें?
माहुर नांदेड़ से लगभग 130–150 किमी दूर है। निकटतम रेलवे स्टेशन किनवट (लगभग 50 किमी) है, जबकि नांदेड़ से अधिक ट्रेनें और बसें उपलब्ध हैं।

रेणुका देवी मंदिर (एकवीरिका शक्तिपीठ), माहुर इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

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