ॐ जय श्री जीण माता, जय श्री जीण माता।
जो ध्यावत जग झंझट, उसका कट जाता ।। ॐ जय।।

रत्न जड़ित सिंहासन, अद्भुत छवि न्यारी।
सिर पर छत्र लसत है, राजत महतारी ।। ॐ जय।।

कर कंगन, मुख बेसर, गल माला सोहे।
मस्तक बिंदिया दमके, मुनि जन मन मोहे ।। ॐ जय।।

उमा रमा है तू ही, ही ब्रह्माणी।
सिंह वाहिनी तू ही, महिमा जग जानी ।। ॐ जय।।

झांझ मृदंग नगारों की ध्वनि अति प्यारी।
दर्शन कर मैया के हर्षित नर नारी ।। ॐ जय।।

जय अम्बे महामाया, जय मंगल करणी।
वरदायिनी जय जननी, जय जय अघ हरणी ।। ॐ जय।।

जो भी इस आरती को प्रेम सहित गावे।
कहे चिरंजी वो निश्चय सुख सम्पत्ति पावे ।। ॐ जय।।

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