हरि हैं राजनीति पढि आए.
समुझी बात कहत मधुकर के,समाचार सब पाए.
इक अति चतुर हुतै पहिलें हीं,अब गुरुग्रंथ पढाए.
बढ़ी बुद्धि जानी जो उनकी , जोग सँदेस पठाए.
ऊधौ लोग भले आगे के, पर हित डोलत धाए.
अब अपने मन फेर पाईहें, चलत जु हुते चुराए.
तें क्यौं अनीति करें आपुन,जे और अनीति छुड़ाए.
राज धरम तो यहै’सूर’,जो प्रजा न जाहिं सताए.

Comments

संबंधित लेख

आगामी उपवास और त्यौहार

गायत्री जयंती

सोमवार, 17 जून 2024

गायत्री जयंती
निर्जला एकादशी

मंगलवार, 18 जून 2024

निर्जला एकादशी
ज्येष्ठ पूर्णिमा

शनिवार, 22 जून 2024

ज्येष्ठ पूर्णिमा
संत कबीर दास जयंती

शनिवार, 22 जून 2024

संत कबीर दास जयंती
संकष्टी चतुर्थी

मंगलवार, 25 जून 2024

संकष्टी चतुर्थी
योगिनी एकादशी

मंगलवार, 02 जुलाई 2024

योगिनी एकादशी

संग्रह