सुण लीजो बिनती मोरी

सुण लीजो बिनती मोरी, मैं शरण गही प्रभु तेरी।
तुम(तो) पतित अनेक उधारे, भव सागर से तारे।।
मैं सबका तो नाम न जानूं कोइ कोई नाम उचारे।
अम्बरीष सुदामा नामा, तुम पहुँचाये निज धामा।
ध्रुव जो पाँच वर्ष के बालक, तुम दरस दिये घनस्यामा।
धना भक्त का खेत जमाया, कबिरा का बैल चराया।।
सबरी का जूंठा फल खाया, तुम काज किये मन भाया।
सदना औ सेना नाई को तुम कीन्हा अपनाई।।
करमा की खिचड़ी खाई तुम गणिका पार लगाई।
मीरा प्रभु तुमरे रंग राती या जानत सब दुनियाई।।

Author: Unknown Claim credit

Comments

संबंधित लेख

आगामी उपवास और त्यौहार

पापमोचनी एकादशी

रविवार, 15 मार्च 2026

पापमोचनी एकादशी
चैत्र नवरात्रि

गुरूवार, 19 मार्च 2026

चैत्र नवरात्रि
गुड़ी पड़वा

गुरूवार, 19 मार्च 2026

गुड़ी पड़वा
उगादी

गुरूवार, 19 मार्च 2026

उगादी
चेटी चंड

शुक्रवार, 20 मार्च 2026

चेटी चंड
राम नवमी

गुरूवार, 26 मार्च 2026

राम नवमी

संग्रह