श्याम मोसूँ ऐंडो डोलै हो
श्याम मोसूँ ऐंडो डोलै हो। औरन सूँ खेलै धमार, म्हासूँ मुखहुँ न बोले हो॥ म्हारी गलियाँ ना फिरे वाके, आँगन डोलै हो। म्हारी अँगुली ना छुए वाकी, बहियाँ मरोरै हो॥ म्हारो अँचरा ना छुए वाको,...
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श्याम मोसूँ ऐंडो डोलै हो। औरन सूँ खेलै धमार, म्हासूँ मुखहुँ न बोले हो॥ म्हारी गलियाँ ना फिरे वाके, आँगन डोलै हो। म्हारी अँगुली ना छुए वाकी, बहियाँ मरोरै हो॥ म्हारो अँचरा ना छुए वाको,...
उर में पधारो मेरे गजानन उर में पधारो मेरे ,कर रहे वंदन तुम्हारे गजानन उर में पधारो मेरे, माता उमा पिता शिव भोले,जाटा से गंग बहावे,सब देवन में पूजित पहले शिव नन्दन कहलावे,गजानन उर में...
तोसों लाग्यो नेह रे प्यारे, नागर नंद कुमार। , नागर नंद कुमार। मुरली तेरी मन हर्यो, बिसर्यो घर-व्यौहार॥ जब तें सवननि धुनि परि, घर आँगण न सुहाइ। पारधि ज्यूँ चूकै नहीं, मृगी बेधी दइ आइ॥...
पग घूँघरू बाँध मीरा नाची रे। मैं तो मेरे नारायण की आपहि हो गई दासी रे। लोग कहै मीरा भई बावरी न्यात कहै कुलनासी रे॥ विष का प्याला राणाजी भेज्या पीवत मीरा हाँसी रे। ‘मीरा’...
मन रे पासि हरि के चरन। सुभग सीतल कमल- कोमल त्रिविध – ज्वाला- हरन। जो चरन प्रह्मलाद परसे इंद्र- पद्वी- हान।। जिन चरन ध्रुव अटल कींन्हों राखि अपनी सरन। जिन चरन ब्राह्मांड मेंथ्यों नखसिखौ श्री...
प्रभु जी तुम दर्शन बिन मोय घड़ी चैन नहीं आवड़े।।टेक।। अन्न नहीं भावे नींद न आवे विरह सतावे मोय।घायल ज्यूं घूमूं खड़ी रे म्हारो दर्द न जाने कोय।।१।।दिन तो खाय गमायो री, रैन गमाई सोय।प्राण...
तनक हरि चितवौ जी मोरी ओर।हम चितवत तुम चितवत नाहींमन के बड़े कठोर।मेरे आसा चितनि तुम्हरीऔर न दूजी ठौर।तुमसे हमकूँ एक हो जीहम-सी लाख करोर।।कब की ठाड़ी अरज करत हूँअरज करत भै भोर।मीरा के प्रभु...
दरस बिन दूखण लागे नैन।जबसे तुम बिछुड़े प्रभु मोरे, कबहुं न पायो चैन।सबद सुणत मेरी छतियां, कांपै मीठे लागै बैन।बिरह व्यथा कांसू कहूं सजनी, बह गई करवत ऐन।कल न परत पल हरि मग जोवत, भई...
बरसै बदरिया सावन कीसावन की मनभावन की।सावन में उमग्यो मेरो मनवाभनक सुनी हरि आवन की।उमड़ घुमड़ चहुँ दिसि से आयोदामण दमके झर लावन की।नान्हीं नान्हीं बूंदन मेहा बरसैसीतल पवन सोहावन की।मीराके प्रभु गिरधर नागरआनंद मंगल...
बसो मोरे नैनन में नंदलाल।मोहनी मूरति सांवरि सूरति, नैणा बने बिसाल।अधर सुधारस मुरली राजत, उर बैजंती-माल।।छुद्र घंटिका कटि तट सोभित, नूपुर सबद रसाल।मीरा प्रभु संतन सुखदाई, भगत बछल गोपाल।।
प्रभुजी मैं अरज करुँ छूं म्हारो बेड़ो लगाज्यो पार।।इण भव में मैं दुख बहु पायो संसा-सोग निवार।अष्ट करम की तलब लगी है दूर करो दुख-भार।।यों संसार सब बह्यो जात है लख चौरासी री धार।मीरा के...
म्हारे घर होता जाज्यो राज।अबके जिन टाला दे जाओ सिर पर राखूं बिराज।।म्हे तो जनम जनमकी दासी थे म्हांका सिरताज।पावणड़ा म्हांके भलां ही पधारया सब ही सुघारण काज।।म्हे तो बुरी छां थांके भली छै घणेरी...