मुख्य सामग्री पर जाएँ

कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

बिना लक्ष्मण के है जग सूना सूना

Bina Lakshman Ke Hai Jag Suna Suna – Lyrics in Hindi

भजन अपडेट:

बिना लक्ष्मण के है जग सूना सूना – लिरिक्स

पाठ

( मूर्छित हुए जब लखनलाल रण में,
लगी चोट रघुवर के तब ऐसी मन में,
रोके सुग्रीव से बोले जाओ,
अभी बंद फ़ौरन लड़ाई कराओ॥ )

बिना लक्ष्मण के है जग सूना सूना,
मुझे और जीने की चाहत नहीं है,
ऐ वीरो मुझे छोड़ के लौट जाओ,
ऐ वीरो मुझे छोड़ के लौट जाओ,
कि लंका विजय की जरुरत नहीं है,
बिना लक्ष्मण के है जग सूना सूना……

मेरा दाहिना हाथ है आज टुटा,
लखन लाल से है मेरा साथ छूटा,
बिना लक्ष्मण के हुआ मैं अपाहीच,
बिना लक्ष्मण के हुआ मैं अपाहीच,
धनुष अब उठाने की ताकत नहीं है,
बिना लक्ष्मण के है जग सूना सूना……

मै दुनिया को क्या मुँह दिखाऊंगा जाकर,
क्या माता को आखिर बताऊंगा जाकर,
मैं कैसे कहूंगा लखन आ रहा है,
मैं कैसे कहूंगा लखन आ रहा है,
मुझे झूट कहने की आदत नहीं है,
बिना लक्ष्मण के है जग सूना सूना……

ये सुनकर पवनसुत बोले आगे बढ़कर,
मैं बूटी संजीवन ले आता हूँ जाकर,
मेरे जीते जी काल लक्ष्मण को खा ले,
अभी काल में इतनी ताकत नहीं है,
मेरे जीते जी काल लक्ष्मण को खा ले……

प्रबल वेग से फिर हनुमान धाए,
उठा कर हथेली पे पर्वत ले आये,
ले आ पहुंचे सूरज निकलने से पहले,
किसी वीर में इतनी करामत नहीं है,
ले आ पहुंचे सूरज निकलने से पहले……

वो लाकर संजीवन लखन को जिलाये,
दो बिछड़े हुए भाई हनुमत मिलाये
है जितनी कृपा राम की उनके ऊपर
किसी भक्त की इतनी इनायत नहीं है,
है जितनी कृपा राम की उनके ऊपर……

करो प्रेम से शर्मा बजरंग का सुमिरन,
सभी दूर हो जाएगी तेरी उलझन,
पढ़े रोज जो लख्खा हनुमत चालीसा,
कभी उसपे आ सकती आफत नहीं है,
करो प्रेम से शर्मा बजरंग का सुमिरन,
कभी तुमपे आ सकती आफत नहीं है…….

बिना लक्ष्मण के है जग सूना सूना,
मुझे और जीने की चाहत नहीं है,
ऐ वीरो मुझे छोड़ के लौट जाओ,
ऐ वीरो मुझे छोड़ के लौट जाओ,
कि लंका विजय की जरुरत नहीं है,
बिना लक्ष्मण के है जग सूना सूना…..

स्रोत / लेखक: पारंपरिक · Claim credit

WhatsApp Facebook

यह भी पढ़ें