।दोहा।
( जिसे दुनियां ठुकरा देती है, उसे द्वार तुम्हारा मिलता है,
जिसे दुनियां नफरत करती है, उसे प्यार तुम्हारा मिलता है,
जगत प्रीत मत करियो रै मनवा जगत प्रीत मत करियो,
हो हरि वादा से डरियो रे मनवा, जगत प्रीत मत करियो।। )

ये जीवन दो दिन का मेला,
उड़ जाए तेरा हंस अकेला,
या पीछे मत पड़ियो रे मनवा, जगत प्रीत मत करियो,
जगत प्रीत मत करियो…..

इस दुनियां में कौन है तेरा,
दो दिन का दुनियां में डेरा,
गुरु चरण चित धरियो रे मनवा, जगत प्रीत मत करियो,
जगत प्रीत मत करियो…..

ये दुनियां तेरे काम न आवै,
क्यों दुनियां में मन भटकावे,
भव से पार उतरियो रे मनवा, जगत प्रीत मत करियो,
हरि वादा से डरियो रे मनवा, जगत प्रीत मत करियों…..

Author: डॉ सजन सोलंकी

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