रे मन रे मन जो मत गावो हरी के गुण ।

नयन मेरे तरस रहे, पाने को श्री हरी दर्शन ।
श्रवन मेरे तरस रहे, सुनने को श्री हरी कीर्तन ॥

हाथ मेरे तरस रहे करने को श्री हरी सेवन ।
जिव्हा मेरी तरस रही करने को हरी नाम स्मरण ॥

दिल मेरा मचल रहा, करने को हरी आलिंगन ।
जीव मेरा तरस रहा पाने को सचिदा आनंद घन ॥

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