मेरे गूर जी का अद्भुत शिवाला

मेरे गूर जी का अद्भुत शिवाला

मेरे गूर जी का अद्भुत शिवाला जो भी आये वो जाए निहाला.

जब दुभ रही थी कश्ती मेरी तब मिल न रहा था किनारा,
मैंने देखा गुरु जी का द्वारा,
मुझ को मिल गया तेरा सहारा तेरे दर मिलता प्रारेम का निवाला
मेरे गूर जी का अद्भुत शिवाला जो भी आये वो जाए निहाला.

डरती मैं गुरु जी इस दुनिया में
तेरे रहमत ने अपना बनाया,
मर गई थी मैं अपनी नजर में
तूने जीने का शोंक जगाया,
भटके राही कोई मिलता उजाला,
मेरे गूर जी का अद्भुत शिवाला जो भी आये वो जाए निहाला.

खुशियाँ मिलती है तेरे दर पे आके,
नही ये मिलती कही और जाके याहा मिलता है खुशियों का खजाना,
तभी तो आता है पूरा जमाना,
मेरे गूर जी का अद्भुत शिवाला जो भी आये वो जाए निहाला

Author: Unknown Claim credit

Comments

संबंधित लेख

आगामी उपवास और त्यौहार

अपरा एकादशी

बुधवार, 13 मई 2026

अपरा एकादशी
शनि जयंती

शनिवार, 16 मई 2026

शनि जयंती
निर्जला एकादशी

गुरूवार, 25 जून 2026

निर्जला एकादशी
ज्येष्ठ पूर्णिमा

सोमवार, 29 जून 2026

ज्येष्ठ पूर्णिमा
योगिनी एकादशी

शुक्रवार, 10 जुलाई 2026

योगिनी एकादशी
देवशयनी एकादशी

शनिवार, 25 जुलाई 2026

देवशयनी एकादशी

संग्रह