रब दी कचेरी विच लेखे जदो होन गे

रब दी कचेरी विच लेखे जदो होन गे

रब दी कचेरी विच लेखे जदो होन गे
कई ऊथे हसण ते कई ऊथे रोण गे

करके गुनाह बेडी बदिया वी भर लई
अमला दी पोथी खाली पाप नाल कर ली
हन्जुआ दे नाल बैठे कालक नु धोण गे
रब…….

डंगरा दे वांग जेह्डे सो गये ते खा गये
नफा लेण आये हथो मूल वी गवा गये
केड़ा मुह लेके अगे रब दे खलोण गे
रब…….

भला मांग हर दिन रब कोलो सब्दा
दुख देके दुज्या नु सुख नहियो लब्दा
मिलन्गे कड़े जेह्डे किकरा नु होण गे
रब……..

धन ने ओ जीव जिनहा सतगुरु तारया
जप के ओ नाम जिनहा जनम सुधारया
उसदी ता मौत वेले सतगुरु होण गे
रब………

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