वो ही वक भरम

श्रृष्टि करता कलम दा कातब संगीत अचारेया साहित कार,
सर्व कला समर्थ सम्पूर्ण सतगुरु वाल्मीकि अवतार
श्रृष्टि करता कलम दा ………

नवी रौशनी लैके आया चानन पूरण माशी दा,
प्रगट दिवस मुबारक सब नु अजर अमर अविनाशी दा
जन्म मरण तो रेह्त है जेह्डा इस दुनिया दा सरजन हार
सर्व कला समर्थ सम्पूर्ण सतगुरु वाल्मीकि अवतार
श्रृष्टि करता कलम दा ………

अर्श फर्श ते मात लोक नु तारेया नाल शिंगार देवो
कदम कदम ते रंग सुनेहरा राहा विच खिलार देवो
गुण ओगुन न किसे दे देखे बक्शन वेले बक्शन हार
सर्व कला समर्थ सम्पूर्ण सतगुरु वाल्मीकि अवतार
श्रृष्टि करता कलम दा ………

वाल्मिक भ्रम ज्ञान गुरु तो निर्धन जिस ने जान लिया
अठ सठ तीर्थ नाह कर बैठे उस ने कर इशनान लिया
जान कार नु मिल के जानो वही एक भ्रम दा सार
सर्व कला समर्थ सम्पूर्ण सतगुरु वाल्मीकि अवतार
श्रृष्टि करता कलम दा ………

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