रिद्धि सिद्धि के तुम हो पति
रिद्धि सिद्धि के तुम हो पति,लाज रखना मेरे गणपति,रिद्धि सिद्धि के तुम हो पति,लाज रखना मेरे गणपति, ज्ञान का तुम तो सागर हो,थोड़ा ज्ञान हमें दीजिए,ज्ञान का तुम तो सागर हो,थोड़ा ज्ञान हमें दीजिए,रिद्धि सिद्धि...
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रिद्धि सिद्धि के तुम हो पति,लाज रखना मेरे गणपति,रिद्धि सिद्धि के तुम हो पति,लाज रखना मेरे गणपति, ज्ञान का तुम तो सागर हो,थोड़ा ज्ञान हमें दीजिए,ज्ञान का तुम तो सागर हो,थोड़ा ज्ञान हमें दीजिए,रिद्धि सिद्धि...
जसोदा हरि पालनैं झुलावै। हलरावै दुलरावै मल्हावै जोइ सोइ कछु गावै॥ मेरे लाल को आउ निंदरिया काहें न आनि सुवावै। तू काहै नहिं बेगहिं आवै तोकौं कान्ह बुलावै॥ कबहुं पलक हरि मूंदि लेत हैं कबहुं...
पहिले हम तोहके मनाईब हों गौंरा के ललनवा,गौंरा के ललनवा हो शंकर के सुमनवा,पहिले हम तोहके मनाईब हों गौंरा के ललनवा, ब्रह्मा से पहिले हों विष्णु से पहिले,भोले से पहिले मनाईब हों गौंरा के ललनवा,पहिले...
ऊधौ, कर्मन की गति न्यारी।सब नदियाँ जल भरि-भरि रहियाँ सागर केहि बिध खारी॥उज्ज्वल पंख दिये बगुला को कोयल केहि गुन कारी॥सुन्दर नयन मृगा को दीन्हे बन-बन फिरत उजारी॥मूरख-मूरख राजे कीन्हे पंडित फिरत भिखारी॥सूर श्याम मिलने...
आबू आबू पधारू गणराज,करियो पूरन हा सबहक काज, पार्वती सूत संकर सुवन कहाबै छि,रिद्धि और सिद्धि के दाता कहाबै छि,सुभ और लाभ के पिता महाराज,आबू आबू पधारु गण राज यौ, गंगा जल स चरण पखराब,घी...
मधुकर! स्याम हमारे चोर।मन हरि लियो सांवरी सूरत¸ चितै नयन की कोर।।पकरयो तेहि हिरदय उर–अंतर प्रेम–प्रीत के जोर।गए छुड़ाय छोरि सब बंधन दे गए हंसनि अंकोर।।सोबत तें हम उचकी परी हैं दूत मिल्यो मोहिं भोर।सूर¸...
आना गौरा जी के लाल हमारे होली में,रिद्धि को लाना सिद्धि को भी लानाआना गौरा जी के लाल हमारे होली में, भोले जी को लाना संग गौरा जी को लाना,बाजे डमरु खड़ताल, हमारे घर होली...
तिहारो दरस मोहे भावे श्री यमुना जी ।श्री गोकुल के निकट बहत हो, लहरन की छवि आवे ॥१॥सुख देनी दुख हरणी श्री यमुना जी, जो जन प्रात उठ न्हावे ।मदन मोहन जू की खरी प्यारी,...
निसिदिन बरसत नैन हमारे।सदा रहत पावस ऋतु हम पर, जबते स्याम सिधारे।।अंजन थिर न रहत अँखियन में, कर कपोल भये कारे।कंचुकि-पट सूखत नहिं कबहुँ, उर बिच बहत पनारे॥आँसू सलिल भये पग थाके, बहे जात सित...
किस रोज पधारो गे गणपति मेरे आंगन में,बेह जाए न कुटिया मेरी आंसुयो के सावन मेंकिस रोज पधारो गे गणपति मेरे आंगन में, तुम्हे कसम है भोले की तुम्हे कसम है गोरा कीतुम्हे भरनी ही...
प्रीति करि काहू सुख न लह्यो।प्रीति पतंग करी दीपक सों आपै प्रान दह्यो।।अलिसुत प्रीति करी जलसुत सों¸ संपति हाथ गह्यो।सारंग प्रीति करी जो नाद सों¸ सन्मुख बान सह्यो।।हम जो प्रीति करी माधव सों¸ चलत न...
दृढ इन चरण कैरो भरोसो, दृढ इन चरणन कैरो ।श्री वल्लभ नख चंद्र छ्टा बिन, सब जग माही अंधेरो ॥साधन और नही या कलि में, जासों होत निवेरो ॥सूर कहा कहे, विविध आंधरो, बिना मोल...