शंकर दयालु दूसरा तुमसा कोई नहीं

शंकर दयालु दूसरा,
तुमसा कोई नहीं,
देने से पहले तू जरा,
क्यों सोचता नहीं,
शंकर दयालु दुसरा,
तुमसा कोई नहीं……….

भस्मासुर ने भक्ति से,
तुझको रिझा लिया,
वरदान भस्म करने का,
दानव ने पा लिया,
तुझको ही भस्म करने की,
पापी ने ठान ली,
देने से पहले तू जरा,
क्यों सोचता नहीं,
शंकर दयालु दुसरा,
तुमसा कोई नहीं…………

गिरिजा की जिद पे था बना,
सोने का वो महल,
मोहरत कराने आया था,
रावण पिता के संग,
सोने की लंका दुष्ट की,
झोली में डाल दी,
देने से पहले तू जरा,
क्यों सोचता नहीं,
शंकर दयालु दुसरा,
तुमसा कोई नहीं……….

मंथन की गाथा क्या कहे,
क्या क्या नहीं हुआ,
अमृत पिलाया देवों को,
और विष तू पी गया,
देवों का देव ‘हर्ष’ तू,
दुनिया ये जानती,
देने से पहले तू जरा,
क्यों सोचता नहीं,
शंकर दयालु दुसरा,
तुमसा कोई नहीं………

शंकर दयालु दूसरा,
तुमसा कोई नहीं,
देने से पहले तू जरा,
क्यों सोचता नहीं,
शंकर दयालु दुसरा,
तुमसा कोई नहीं……….

Author: Unknown Claim credit

Comments

संबंधित लेख

आगामी उपवास और त्यौहार

करवा चौथ

गुरूवार, 29 अक्टूबर 2026

करवा चौथ
धनतेरस

शुक्रवार, 06 नवम्बर 2026

धनतेरस
दीपावली

रविवार, 08 नवम्बर 2026

दीपावली
गोवर्धन पूजा

मंगलवार, 10 नवम्बर 2026

गोवर्धन पूजा

संग्रह