संईयो मेरे सतगुरु दा दरबार अनोखा है

संईयो मेरे सतगुरु दा दरबार अनोखा है

संईयो मेरे सतगुरु दा दरबार अनोखा हैं
मैं ता सारा जग वेखिया सब धोखा ही धोखा है

जन्मांं तों रूलदांमैं तेरी शरण आया,
सतगुरू मेरी बांह फड़ के,मैनूं चरणां दे नाल लाया,
गुरु वाला रंगनी संईयो, सारे जग तो अनोखा है,
संईयो मेरे सतगुरु—————————

सार कोई लैंदा नहीं, सार लैंदें सतगुरु जी,
दुख कोई कटदा नहीं,दुख कटदे ने सतगुरु जी,
गुरां वाली भगति दा,राह ढंग अनोखा है,
संईयो मेरे सतगुरु—————————-

संईयो मेरे सतगुरु ने, इक नांव बनाई है,
भगतां दे तारन नूं , इक युगति बनाई है,
गुरु किरपा तो बिना, भव तरना ओखा है,
संईयो मेरे सतगुरु—————————

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