पहले मनाऊं तोहै अंजनी के लाला,
मेरी सुन ले पुकार आजा मंदिर में, मंदिर में…..

रावण ने जब सिया चुराई धर जोगी का भेष हो,
पर्वत पर्वत रघुवर घूमे लखन लाल के साथ हो,
कष्ट निवारण तूने अंजनी के लाला,
मेरी सुन ले पुकार आजा मंदिर में, मंदिर में….

सीता की सुध लेने गए जब दई मुद्रिका डाल हो,
फल खाए और वृक्ष उखाड़े योद्धा दीने मार हो,
लंका जलाई तूने अंजनी के लाला,
मेरी सुन ले पुकार आजा मंदिर में, मंदिर में…..

शक्ति बाण लगा लक्ष्मण के बूटी लेने जाए हो,
लाय सजीवन गोट पिलाई लखन के प्राण बचाए हो,
प्राण बचाए तेरे अंजनी के लाला,
मेरी सुन ले पुकार आजा मंदिर में, मंदिर में…..

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