खाटू आना जाना जब से बढ़ गया

खाटू आना जाना जब से बढ़ गया

खाटू आना जाना जब से बढ़ गया,
श्याम प्रेम का मुझपे भी रंग चढ़ गया,
रंग चढ़ गया रंग चढ़ गया श्याम का,
खाटू आना जाना जब से बढ़ गया…

पहले तो हम साल में इक दो बार मिल पाते थे,
यादो के सहारे ही अपना वक़्त बिताते थे,
दिल में है क्या ये पड़ लेता जब चाहे भुला लेता,
रंग चढ़ गया रंग चढ़ गया श्याम का,
खाटू आना जाना जब से बढ़ गया…

चिंता सौंप सी श्याम को हम चिंतन में रहते है,
हम दीवाने श्याम के सीना ठोक के कहते है,
जब से बना ये हमसफ़र हम तो हुए है वेफिकर,
रंग चढ़ गया रंग चढ़ गया श्याम का,
खाटू आना जाना जब से बढ़ गया…

सांवरिया के प्रेम में जबसे हम तो पढ़ गये,
जग के झूठे फरेब से हम तो ऊपर उठ गये,
मोहित कहे हु खुश नसीब हम भी हुए इन के करीब,
रंग चढ़ गया रंग चढ़ गया श्याम का,
खाटू आना जाना जब से बढ़ गया…

खाटू आना जाना जब से बढ़ गया,
श्याम प्रेम का मुझपे भी रंग चढ़ गया,
रंग चढ़ गया रंग चढ़ गया श्याम का,
खाटू आना जाना जब से बढ़ गया…

Author: Unknown Claim credit

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