गणपती प्रकाश
एक रोज, माता पार्वती ने मन में किया ध्यान,उबटन मली शरीर पे, करने को माँ स्नान,मलने के बाद, उस मैल को जमा कर लिया,और फेंकने को माँ ने, इरादा कर लिया,नहीं थे भोले नाथ उस...
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एक रोज, माता पार्वती ने मन में किया ध्यान,उबटन मली शरीर पे, करने को माँ स्नान,मलने के बाद, उस मैल को जमा कर लिया,और फेंकने को माँ ने, इरादा कर लिया,नहीं थे भोले नाथ उस...
लो जी आ गए है…..-2लो जी आ गए है गणपतिचूहे पे सवार होके आ गए है ॥ पिता है जिनके, कैलाश वासी,कैलाश वासी जी कैलाश वासी,कैलाश पर्वत के, लगते जो नाती,लगते जो नाती जी लगते...
नमन है तुझको हे गजराज, कृपा करदो मुझपर महाराज,विघ्न विनाशक प्रथम पूज्य तुम, दुनिया के सरताज,कृपा करदो मुझपर महाराज, नमन है तुझको हे गजराज,नमन है तुझको हे गजराज, कृपा करदो मुझपर महाराज । गुणों के...
वक्रतुंडा महाकाया,सूर्यकोटि सम्प्रभा,निर्विघ्नम कुरुमे देव,सर्व कार्येशु सर्वदा। गणपति बप्पा मोरया तेरा करम मेरा भरम,मेरा धर्म तू ही तू,जनम वनम कुछ भी नहीं,परम तू ही तू,सीताम वितम दया क्षमा,अजब तेरी अदा है,जगत तू ही भगत तू...
गजदंत के राजे बप्पा मोरिया,मूषक पे विराजे बप्पा मोरिया,गजदंत के राजे बप्पा मोरिया,मूषक विराजे बाप्पा मोरिया। तेरे मस्तक पे सोहे गुलाल का रंग,तेरी होती है पूजा गोरी के संग,धन्य तेरे चरणों को छूके हुए,तेरी काया...
हो तेरे दम से फैला उजाला,गणपति बाप्पा मोरिया,हो हम सब का है तू रखवाला,गणपति बाप्पा मोरिया ॥ हो तेरे दम से एक कदम से,दुनिया तो हिल जाये,हो मुश्किल में,मांगो जो दिल से,सब कुछ मिल जाए,एक...
जय हो गिरिजा के लाल,जय हो शम्भू के लाल,हे गणनायक, करुना सागर, तुम हो दीन दयाल,जय हो गिरिजा के लाल,जय हो शम्भू के लाल॥ विघ्न के हर्ता हे अविनाशी कार्तिक के भैया,कार्तिक के भैया, कार्तिक...
बृथा सु जन्म गंवैहैंजा दिन मन पंछी उडि़ जैहैं।ता दिन तेरे तनु तरवर के सबै पात झरि जैहैं॥या देही को गरब न करिये स्यार काग गिध खैहैं।तीन नाम तन विष्ठा कृमि ह्वै नातर खाक उड़ैहैं॥कहं...
सकल सुख के कारनभजि मन नंद नंदन चरन।परम पंकज अति मनोहर सकल सुख के करन॥सनक संकर ध्यान धारत निगम आगम बरन।सेस सारद रिषय नारद संत चिंतन सरन॥पद-पराग प्रताप दुर्लभ रमा कौ हित करन।परसि गंगा भई...
उपमा हरि तनु देखि लजानी।कोउ जल मैं कोउ बननि रहीं दुरि कोउ कोउ गगन समानी॥मुख निरखत ससि गयौ अंबर कौं तडि़त दसन-छबि हेरि।मीन कमल कर चरन नयन डर जल मैं कियौ बसेरि॥भुजा देखि अहिराज लजाने...
हम भगतनि के भगत हमारे।सुनि अर्जुन परतिग्या मेरी यह ब्रत टरत न टारे॥भगतनि काज लाज हिय धरि कै पाइ पियादे धाऊं।जहां जहां पीर परै भगतनि कौं तहां तहां जाइ छुड़ाऊं॥जो भगतनि सौं बैर करत है...
सबसे ऊँची प्रेम सगाई।दुर्योधन की मेवा त्यागी, साग विदुर घर पाई॥जूठे फल सबरी के खाये बहुबिधि प्रेम लगाई॥प्रेम के बस नृप सेवा कीनी आप बने हरि नाई॥राजसुयज्ञ युधिष्ठिर कीनो तामैं जूठ उठाई॥प्रेम के बस अर्जुन-रथ...