दियौ अभय पद ठाऊँ
दियौ अभय पद ठाऊँतुम तजि और कौन पै जाउँ।काकैं द्वार जाइ सिर नाऊँ, पर हथ कहाँ बिकाउँ॥ऐसौ को दाता है समरथ, जाके दियें अघाउँ।अन्त काल तुम्हरैं सुमिरन गति, अनत कहूँ नहिं दाउँ॥रंक सुदामा कियौ अजाची,...
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दियौ अभय पद ठाऊँतुम तजि और कौन पै जाउँ।काकैं द्वार जाइ सिर नाऊँ, पर हथ कहाँ बिकाउँ॥ऐसौ को दाता है समरथ, जाके दियें अघाउँ।अन्त काल तुम्हरैं सुमिरन गति, अनत कहूँ नहिं दाउँ॥रंक सुदामा कियौ अजाची,...
तजौ मन, हरि बिमुखनि कौ संग।जिनकै संग कुमति उपजति है, परत भजन में भंग।कहा होत पय पान कराएं, बिष नही तजत भुजंग।कागहिं कहा कपूर चुगाएं, स्वान न्हवाएं गंग।खर कौ कहा अरगजा-लेपन, मरकट भूषण अंग।गज कौं...
ऐसी प्रीति की बलि जाऊं।सिंहासन तजि चले मिलन कौं, सुनत सुदामा नाउं।कर जोरे हरि विप्र जानि कै, हित करि चरन पखारे।अंकमाल दै मिले सुदामा, अर्धासन बैठारे।अर्धांगी पूछति मोहन सौं, कैसे हितू तुम्हारे।तन अति छीन मलीन...
सोभित कर नवनीत लिए।घुटुरुनि चलत रेनु तन मंडित मुख दधि लेप किए॥चारु कपोल लोल लोचन गोरोचन तिलक दिए।लट लटकनि मनु मत्त मधुप गन मादक मधुहिं पिए॥कठुला कंठ वज्र केहरि नख राजत रुचिर हिए।धन्य सूर एकौ...
मैं मनावां तेरा लाडला गणेश,हो.. मैं मनावां, मैं मनावां,मैं मनावां तेरा लाडला गणेश,जिसदे सिमरन ते जग वालो,कट जान सारे कलेश,मैं मनावां तेरा लाडला गणेश।। किस मईया ने तैनू जनम देयो है,किस ने देयो उपदेश, ओ...
आजु मैं गाई चरावन जैहोंबृंदाबन के भाँति भाँति फल, अपने कर मैं खैहौं।ऎसी बात कहौ जनि बारे, देखौ अपनी भांति।तनक तनक पग चलिहौ कैसें, आवत ह्वै है राति।प्रात जात गैया लै चारन, घर आवत है...
हमारे हरि हारिल की लकरी.मन क्रम वचन नंद-नंदन उर, यह दृढ करि पकरी.जागत सोवत स्वप्न दिवस-निसि,कान्ह-कान्ह जकरी.सुनत जोग लागत है ऐसो, ज्यौं करूई ककरी.सु तौ ब्याधि हमकौं लै आए,देखी सुनी न करी.यह तौ ‘सूर’ तिनहिं...
मनावां तेरा अद्भुत लाडला गणेश,अद्भुत लाडला गणेश,हो…. अद्भुत लाडला गणेश,मनावां तेरा अद्भुत लाडला गणेश।। किस माँ लाडले नु, जनम देयो है,किस ने देयो उपदेश,हो… किस ने देयो उपदेश,मनावां तेरा अद्भुत लाडला गणेश।। माँ गौरा ने...
सिर पे सजा के मोतियों का ताज,रखने को अपने भक्तों की लाज,ये गौरी के ललना आये गजराज,गौरी के ललना आये गजराज,सिर पे सजाके मोतियों का ताज,रखने को अपने भक्तों की लाज,ये गौरी के ललना आये...
गिरि जनि गिरै स्याम के कर तैं।करत बिचार सबै ब्रजवासी, भय उपजत अति उर तैं।लै लै लकुट ग्वाल सब धाए, करत सहाय जु तुरतैं।यह अति प्रबल, स्याम अति कोमल, रबकि-रबकि हरबर तैं।सप्त दिवस कर पर...
ऊधौ,तुम हो अति बड़भागीअपरस रहत सनेह तगा तैं, नाहिन मन अनुरागीपुरइनि पात रहत जल भीतर,ता रस देह न दागीज्यों जल मांह तेल की गागरि,बूँद न ताकौं लागीप्रीति-नदी में पाँव न बोरयौ,दृष्टि न रूप परागी‘सूरदास’ अबला...
नयन से नयन से,नयन से नयन से,दरस कर ले, मन के नयन से,विनायक रिझेंगे पल में, भजन से। तन की आँखों पे है, कैसा पर्दा गिरा,माया का जग में कही, दिखता है ना सिरा,तन की...