शिव पार्वती

शिव पार्वती

मेरी सुनते जाइयो भोलेनाथ
कहवे पार्वती तेरी
तेरे खातिर होगी थी जो राख
बोले सती तेरी
तेरे वस में यो सारा जहान
कैलाश पे बैठ्या ला के ध्यान
तने किसा बना राख्या से भेष
तू राख से करता है स्नान
के भूत भविष्य वर्तमान
सब काल गति तेरी

सुनते जाइयो भोलेनाथ
कहवे पार्वती तेरी
तेरे खातिर होगी थी जो राख
बोले सती तेरी
मेरी सुनते जाइयो भोलेनाथ
कहवे पार्वती तेरी

तू सुर है, तू साज है
तू अंत है, तू आगाज है
तेरे ते शुरू चारों दिशा
तू शांति है, तू आवाज है
तने दुखां का होता ना एहसास
मस्तक पे चाँद तेरे करे वास
तेरे जटा से बहती है गंगा
तने कदे लागती नहीं प्यास
पर बारात में आए
बस पिशाच क्यों पशुपति तेरी

सुनते जाइयो भोलेनाथ
कहवे पार्वती तेरी
तेरे खातिर होगी थी जो राख
बोले सती तेरी
मेरी सुनते जाइयो भोलेनाथ
कहवे पार्वती तेरी

कदे इतना भोला भाला
बिन सोचे विष पी जावे
कदे इतना छोह में आवे तू
तने पुत्र मोह ना आवे
मेरा शिव है तू
मेरी शक्ति तू
मैं तुझमें लीन
मेरी भक्ति तू
तुझसे मिलन के लिए शिवा
सौ बार जनम ले सकती हूँ
हर जनम रहवेगा मेरा तू
या सारी श्रष्टि तेरी

सुनते जाइयो भोलेनाथ
कहवे पार्वती तेरी
तेरे खातिर होगी थी जो राख
बोले सती तेरी
मेरी सुनते जाइयो भोलेनाथ
कहवे पार्वती तेरी

Author: Ndee Kundu

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