मेरी शेरोंवाली मैया रे मेरी मेहरोंवाली मैया रे,
मेरी ज्योतोवाली मैया रे मेरी लाटोंवाली मैया रे,
मेरी शेरोंवाली मैया रे……

इस जीवन की तुम जीवन हो,
मेरी मैया तुम्हे कैसे बतलाऊं,
अगर दुख होता पार तुम्हारे बिना,
इस विराह व्यथा को कहाँ तक गांऊ,
इस विराह व्यथा को कहाँ तक गांऊ,
हक देती हो तुम भी मैया,
जब मै अपना दुख दर्द सुनांऊ,
मेरे दिल मे रहती हो मैया तुम्ही,
कैसे अपना दिल चीर दिखांऊ,
कैसे अपना दिल चीर दिखांऊ,
मेरी शेरोंवाली मैया रे…….

पुछुं ईक बात बताओगी क्या,
मैया ये निठुरता धारी है क्यों,
जब हम नही तुम्हे विसारते है,
तुने मेरी याद विसारी है क्यों,
तुने मेरी याद विसारी है क्यों,
हो के दीनों की बन्धु है माँ,
ना पुछी बात है हमारी क्यों,
जब लाखो पापी तार दिये,
फिर मेरी वार इन्कारी है क्यों,
फिर मेरी वार इन्कारी है क्यों,
मेरी शेरोंवाली मैया रे…….

कोई बोले ना बोले हमसे,
हमको इसकी परवाह नही,
हमे चाह है अपनी मैया की,
किसी ओर की हम को चाह नही,
किसी ओर की हम को चाह नही,
कोई आये तो बैठे पलकों पर,
जाये तो कोई इन्कार नही,
हम चाकर अपनी मैया के है,
किसी ओर के ताबेदार नही,
किसी ओर के ताबेदार नही,
मेरी शेरोंवाली मैया रे…….

तुझ बिन मेरी मैया प्यारी,
अब मुझे को लाड लडायेगा कौन,
माँ तुने ही ठुकराया जो दर से,
मैया फिर मुझको अपनायेगा कौन,
फिर मुझको अपनायेगा कौन,
मात पिता ओर भाई बन्धु स्वार्थ के,
सब मीत है अब किसके गले लगु मै,
मैया तुझ बिन बांये फैलायेगा कौन,
तुझ बिन बांये फैलायेगा कौन,
मेरी शेरोंवाली मैया रे…….

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